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दिल्ली-NCR में पेट्रोल-डीजल और CNG मालवाहक गाड़ियों के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक, 2027 से लागू होगा नियम

 

नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने मालवाहक वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत पेट्रोल, डीजल और CNG से चलने वाले हल्के मालवाहक वाहनों (LGV) के नए रजिस्ट्रेशन पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगाई जाएगी। 

सबसे पहले 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में 3.5 टन तक वजन वाले N1 श्रेणी के पेट्रोल, डीजल और CNG मालवाहक वाहनों का नया रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा। इसके बाद यह नियम NCR के अन्य इलाकों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू होगा। 

इन शहरों में जुलाई 2027 से लागू होगा नियम

1 जुलाई 2027 से गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में भी नए पेट्रोल, डीजल और CNG N1 मालवाहक वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लागू होगी। वहीं, बाकी NCR जिलों में 1 जनवरी 2028 से नए पेट्रोल और डीजल N1 वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगेगी। इन जिलों में फिलहाल CNG N1 वाहनों को अनुमति जारी रहेगी। 

N2 वाहनों पर भी लगेगी पाबंदी

CAQM ने 3.5 से 7.5 टन तक वजन वाले N2 श्रेणी के मालवाहक वाहनों को भी नियमों में शामिल किया है। दिल्ली में इनके नए पेट्रोल, डीजल और CNG रजिस्ट्रेशन पर 1 जनवरी 2028 से रोक लगेगी। इसके बाद जुलाई 2028 से यह नियम पांच हाई-व्हीकल-डेंसिटी वाले NCR जिलों में लागू होगा। बाकी NCR जिलों में पेट्रोल और डीजल N2 वाहनों पर रोक 1 जनवरी 2029 से लागू होगी, जबकि CNG को वहां फिलहाल अनुमति रहेगी। 

प्रदूषण में मालवाहक वाहनों की बड़ी हिस्सेदारी

CAQM के मुताबिक, NCR में LGV कुल सक्रिय वाहनों का करीब 1.2 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल वाहनों से होने वाले PM उत्सर्जन में इनकी हिस्सेदारी लगभग 3.3 प्रतिशत है। मालवाहक वाहन ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, कूरियर और शहरी सामान की सप्लाई में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं और लंबे समय तक सड़क पर चलते हैं। 

CNG को भी क्यों किया गया शामिल?

CAQM का कहना है कि CNG से सीधे निकलने वाले पार्टिकुलेट प्रदूषण को कम किया जा सकता है, लेकिन इसके इस्तेमाल से NOx जैसे प्रदूषक निकलते हैं, जो वातावरण में सेकेंडरी PM2.5 के निर्माण में योगदान कर सकते हैं। इसी वजह से भविष्य में CNG मालवाहक वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन को भी चरणबद्ध तरीके से सीमित करने का फैसला किया गया है।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-NCR में पारंपरिक ईंधन वाले मालवाहक वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव को तेज करना और वाहन प्रदूषण के जरिए होने वाले PM2.5 उत्सर्जन को कम करना है।