नई दिल्ली: UGC-NET परीक्षा में प्रश्नपत्रों से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण तीन विषयों की परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित कराने के फैसले को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी पर तीखा निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था की खामियों का सीधा असर उन हजारों छात्रों पर पड़ रहा है, जिन्होंने परीक्षा के लिए लंबे समय तक तैयारी की, फीस जमा की और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए समय और पैसा खर्च किया।
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की ओर से इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की UGC-NET परीक्षाएं दोबारा आयोजित कराने की घोषणा के बाद राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने महीनों और वर्षों तक परीक्षा की तैयारी की, उन्हें अब दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की ओर से एक बार फिर गंभीर चूक सामने आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर परीक्षा व्यवस्था में बार-बार ऐसी गलतियां क्यों हो रही हैं और इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा।
राहुल गांधी ने कहा कि 22 से 30 जून के बीच इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की UGC-NET परीक्षाएं आयोजित की गई थीं। उनके मुताबिक, करीब दो महीने बाद इन तीनों परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया, क्योंकि प्रश्नपत्र तैयार करने में गड़बड़ियां सामने आईं और पुराने प्रश्न दोबारा पूछे जाने की शिकायतें सामने आईं।
उन्होंने इस फैसले के बाद छात्रों की परेशानियों का मुद्दा भी उठाया। राहुल गांधी के मुताबिक, हजारों उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए लंबे समय तक मेहनत की, आवेदन किया, फीस भरी और कई उम्मीदवारों को अपने घरों से दूर परीक्षा केंद्रों तक यात्रा करनी पड़ी। अब उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए सितंबर में फिर से तैयारी करनी होगी और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना होगा।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि गलती परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की है तो उसकी सजा छात्रों को क्यों मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी ओर से परीक्षा की तैयारी और आवेदन की प्रक्रिया पूरी की थी, लेकिन व्यवस्था की खामी के कारण उन्हें दोबारा समय, पैसा और मेहनत खर्च करनी पड़ रही है।
कांग्रेस नेता ने शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली छात्रों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने कोटा, देहरादून और प्रयागराज में भी परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे और आगे भी इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए परीक्षा केवल एक प्रश्नपत्र हल करने की प्रक्रिया नहीं है। इसके पीछे कई महीनों की तैयारी, परिवार का आर्थिक खर्च, यात्रा, परीक्षा शुल्क और भविष्य से जुड़ी उम्मीदें होती हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा परीक्षा कराना छात्रों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा करता है।
राहुल गांधी ने परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या परीक्षा आयोजित होने से पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो चुके थे। हालांकि, यह एक राजनीतिक सवाल के रूप में उठाया गया आरोप है और इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आधिकारिक जांच और तथ्य सामने आना जरूरी है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा भी उठाया
राहुल गांधी ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किसी एक व्यक्ति का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है और परीक्षा प्रणाली से जुड़ी एजेंसी के शीर्ष स्तर पर भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा से जुड़ी एजेंसियां अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेने से बचती हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यदि किसी संस्था की लापरवाही के कारण हजारों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ती है, तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
राहुल गांधी ने सितंबर में दोबारा परीक्षा देने जा रहे छात्रों से कहा कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक बहस से आगे ले जाकर व्यवस्था की जवाबदेही का विषय बताया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को परीक्षा प्रणाली में हो रही लगातार समस्याओं का जवाब देना चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि छात्रों के कीमती साल, पैसा और मेहनत बर्बाद होने की स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सितंबर में होगी दोबारा परीक्षा
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने रद्द की गई तीन विषयों की UGC-NET परीक्षाओं के लिए नई तारीखों की घोषणा की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इंग्लिश और कॉमर्स विषयों की पुनर्परीक्षा 9 सितंबर को आयोजित की जाएगी, जबकि सोशियोलॉजी विषय की परीक्षा 10 सितंबर को होगी।
पुनर्परीक्षा के ऐलान के बाद अब संबंधित उम्मीदवारों को नई परीक्षा तारीख के अनुसार अपनी तैयारी करनी होगी। वहीं, छात्रों के बीच परीक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों पर आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है।
पूरे मामले में अब छात्रों की नजर परीक्षा की नई तारीखों, परीक्षा केंद्रों और प्रशासन की ओर से किए जाने वाले सुरक्षा एवं गुणवत्ता संबंधी इंतजामों पर रहेगी।