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JNU में फैकल्टी भर्ती को लेकर विवाद, VC ने आरोपों को बताया प्रोपेगैंडा

 

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में फैकल्टी भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। छात्र संघ और शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भर्ती, पदोन्नति और आरक्षण से जुड़े नियमों के पालन में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। वहीं, JNU की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें ‘प्रोपेगैंडा’ बताया है। 

शिक्षक संघ का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में फैकल्टी प्रमोशन और सीधी भर्ती की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। संघ के मुताबिक, फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच 228 प्रमोशन मामलों पर विचार किया गया, जबकि इसी अवधि में 361 सीधी भर्ती के लिए चयन समितियां आयोजित हुईं। शिक्षक संघ ने कई प्रमोशन मामलों के लंबित रहने और आरक्षण नीति के पालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। 

इसी बीच JNU छात्र संघ और शिक्षक संघ ने कुलपति के खिलाफ सार्वजनिक जांच भी आयोजित की थी। अप्रैल 2026 में जारी इस जांच रिपोर्ट में दोनों संगठनों ने VC पर लगाए गए आरोपों को सही ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की थी। हालांकि, यह रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक जांच नहीं थी और कुलपति ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। 

कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने प्रशासन का बचाव करते हुए कहा है कि उनके कार्यकाल में भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी रही है। जनवरी 2026 में भी उन्होंने दावा किया था कि विश्वविद्यालय ने ऐतिहासिक फैकल्टी भर्ती पूरी की है और समावेशी एवं पारदर्शी प्रमोशन किए गए हैं। 

विवाद के बीच छात्र और शिक्षक संगठनों की ओर से कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि भर्ती और पदोन्नति नियमों के अनुरूप की गई है। ऐसे में JNU में प्रशासन और शिक्षक-छात्र संगठनों के बीच टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ने के संकेत हैं।