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प्रचंड हेलिकॉप्टर निर्माण में बड़ा कदम, HAL ने अडानी डिफेंस और BEML से मिलाया हाथ

 

नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) ‘प्रचंड’ के उत्पादन को रफ्तार देने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने बड़ा कदम उठाया है। HAL ने प्रचंड हेलिकॉप्टर के फ्यूजलेज ढांचे के निर्माण के लिए BEML और अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां मिलकर कुल 90 फ्यूजलेज तैयार करेंगी।

BEML बनाएगी 48, अडानी डिफेंस 42 फ्यूजलेज

समझौते के मुताबिक BEML को 48 फ्यूजलेज बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि अडानी डिफेंस 42 फ्यूजलेज का निर्माण करेगी। बाकी फ्यूजलेज का निर्माण HAL खुद करेगा। HAL के मुताबिक निजी क्षेत्र को पहली बार प्रचंड हेलिकॉप्टर के फ्यूजलेज निर्माण की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

156 प्रचंड हेलिकॉप्टरों का बड़ा ऑर्डर

भारत सरकार ने मार्च 2025 में HAL के साथ 156 प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टरों की खरीद के लिए करीब 62,700 करोड़ रुपये के दो अनुबंध किए थे। इनमें 90 हेलिकॉप्टर भारतीय सेना और 66 भारतीय वायुसेना के लिए हैं। इनकी आपूर्ति तीसरे वर्ष से शुरू होकर अगले पांच वर्षों में पूरी की जानी है।

प्रचंड को खास तौर पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह भारत का स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर है और 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर संचालन की क्षमता रखता है। 

आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

HAL का कहना है कि BEML और अडानी डिफेंस के साथ यह साझेदारी देश के एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू कंपनियों की भागीदारी को भी मजबूत करेगी। इससे प्रचंड के बड़े उत्पादन कार्यक्रम के लिए एक व्यापक भारतीय सप्लाई चेन तैयार होने की उम्मीद है। 

156 हेलिकॉप्टरों के इस बड़े कार्यक्रम में देश की 250 से अधिक घरेलू कंपनियों, खासकर MSME क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। 

HAL, BEML और अडानी डिफेंस की यह साझेदारी भारत के रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी उद्योग के बढ़ते सहयोग को दर्शाती है। प्रचंड के उत्पादन में तेजी आने से भारतीय सशस्त्र बलों की स्वदेशी लड़ाकू क्षमता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।