12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया फ्लाइट 171 के क्रैश में मारे गए चार यात्रियों के परिवारों ने बोइंग और हनीवेल के खिलाफ अमेरिकी डेलावेयर सुपीरियर कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। यह मुकदमा विमान के ईंधन कट-ऑफ स्विच के दोषपूर्ण होने का आरोप लगाता है, जिससे विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में कुल 260 लोगों की जान गई थी।
परिवारों की ओर से दायर इस मुकदमे में कहा गया है कि बोइंग और हनीवेल को उनकी ईंधन नियंत्रण स्विच के डिजाइन में खामी के बारे में जानकारी थी। यह स्विच इतने नजदीक और यात्रा के लिए महत्वपूर्ण थे कि इन्हें आकस्मिक रूप से सक्रिय किया जा सकता था। 2018 में अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने इन स्विचों की जांच की सिफारिश की थी, लेकिन यह अनिवार्य नहीं थी।
भारत की विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि एयर इंडिया ने इस जांच को नहीं किया था। विमान में 2019 और 2023 में थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल बदला गया था, जिसमें ये स्विच शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार सभी आवश्यक एयरवर्थिनेस निर्देशों का पालन किया गया था।
हालांकि FAA और अन्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये स्विच आकस्मिक रूप से चालू या बंद नहीं हो सकते। परिवारों का आरोप है कि कंपनीयों ने संभावित खतरों की जानकारी नहीं दी और यह कोई कड़ा कदम नहीं उठाया।
पीड़ितों में कांटाबेन धीरुभाई पाघड़ाल, नाव्या चिराग पाघड़ाल, कुबेरभाई पटेल और बबीबेन पटेल शामिल हैं। यह पहला मामला बताया जा रहा है जो यूएस कोर्ट में बोइंग और हनीवेल के खिलाफ दायर हुआ है।
इस मुकदमे के माध्यम से परिवारों ने अनिश्चित रूप से क्षतिपूर्ति की मांग की है। विमान का एएआईबी का अंतिम रिपोर्ट संभवतः 2026 में जारी होगा।