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विश्लेषण: राहुल गांधी के152 पेपर लीक के दावे में कितनी सच्चाई? देश के वो 10 बड़े कांड जिन्होंने रोजगार तंत्र को हिला दिया

नई दिल्ली बुधवार, 22 जुलाई 2026 देश में नीट (NEET) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षाओं को लेकर मचे राष्ट्रव्यापी बवाल के बीच संसद से लेकर सड़क तक पेपर लीक का मुद्दा गर्म है। राहुल गांधी के '152 पेपर लीक और 0 कनविक्शन' के दावे को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि

मीडिया रिपोर्ट्स और विभिन्न राज्यों के एसटीएफ (STF) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में देश के 1.4 अरब से अधिक युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हुआ है और सजा की दर बेहद निराशाजनक रही है।

क्यों सच के करीब है '0 कनविक्शन' का दावा?

पेपर लीक के मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज करती है, गिरोह के गुर्गों को जेल भेजती है, लेकिन जब मामला अदालत में जाता है, तो ठोस डिजिटल सबूतों की कमी, गवाहों के मुकर जाने और लचर चार्जशीट के कारण मुख्य आरोपी (माफिया) बरी हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश, लीक और व्यापमं जैसे बड़े मामलों में भी सालों बाद भी मुख्य दोषियों को अंतिम सजा (कनविक्शन) नहीं मिल सकी है।


पिछले एक दशक के 10 सबसे बड़े पेपर लीक कांड

1. व्यापमं घोटाला (मध्य प्रदेश - 2013-15)

यह भारत के इतिहास का सबसे खूंखार और बड़ा शिक्षा घोटाला माना जाता है। इसमें मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ। इस मामले से जुड़े कई गवाहों और आरोपियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे देश को दहला दिया था।

2. यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती (उत्तर प्रदेश - 2024)

फरवरी 2024 में आयोजित इस परीक्षा में करीब 48 लाख उम्मीदवारों ने भाग लिया था। परीक्षा के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर पेपर लीक के सबूत तैरने लगे। युवाओं के भारी आक्रोश के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा रद्द कर दी और एसटीएफ को जांच सौंपी।

3. REET और आरपीएससी शिक्षक भर्ती (राजस्थान - 2021-22)

राजस्थान पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक का 'एपिसेंटर' बनकर उभरा। रीट (REET) परीक्षा का पेपर शिक्षा संकुल के मजबूत लॉकर से लीक हो गया था। इसके बाद 2022 में सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती का पेपर चलती बस में अभ्यर्थियों को हल करवाते हुए पकड़ा गया था।

4. बीपीएससी 67वीं पीटी (बिहार - 2022)

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही टेलीग्राम ग्रुप्स पर लीक हो गया था। इसके बाद आयोग को परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जिससे प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों को झटका लगा।

5. नीट-यूजी विवाद (राष्ट्रीय स्तर - 2024)

एनटीए (NTA) द्वारा आयोजित देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में बड़े पैमाने पर धांधली, ग्रेस मार्क्स विवाद और पटना व गोधरा में पेपर लीक के मामले सामने आए। इस मामले की गूंज सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक सुनाई दी।

6. एसएससी सीजीएल (राष्ट्रीय स्तर - 2018)

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा के टियर-2 में स्क्रीन शेयरिंग सॉफ्टवेयर के जरिए रिमोट एक्सेस लेकर पेपर हल कराने का रैकेट पकड़ा गया था। इसके खिलाफ दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स के बाहर छात्रों ने महीनों तक ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था।

7. उत्तराखंड पटवारी और एई/जेई भर्ती (उत्तराखंड - 2023)

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) के अनुभाग अधिकारी ने ही अपने कस्टडी से पटवारी भर्ती का पेपर लीक कर दिया था। इसके बाद उत्तराखंड सरकार को देश का सबसे सख्त 'एंटी-पेपर लीक कानून' अध्यादेश के जरिए लाना पड़ा था।

8. तेलंगाना टीएसपीएससी ग्रुप-1 (तेलंगाना - 2023)

तेलंगाना राज्य लोक सेवा आयोग के कंप्यूटर सिस्टम को हैक करके ग्रुप-1 और अन्य तकनीकी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र पेन ड्राइव के जरिए चुराए गए और लाखों रुपये में बेचे गए। इसके कारण तत्कालीन सरकार को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था।

9. हरियाणा क्लर्क और कांस्टेबल भर्ती (हरियाणा - 2021)

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) की पुरुष कांस्टेबल परीक्षा का पेपर कैथल और अन्य जिलों में परीक्षा से पहले ही व्हाट्सएप पर वायरल हो गया था। जम्मू-कश्मीर के एक गिरोह के तार इस लीक से जुड़े पाए गए थे।

10. जेएसएससी सीजीएल (झारखंड - 2024)

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद छात्रों ने रांची की सड़कों पर उग्र प्रदर्शन किया। जांच में पता चला कि परीक्षा कराने वाली ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के जरिए पेपर लीक की साजिश रची गई थी।


क्या बदला है अब?

पेपर लीक की इस राष्ट्रीय समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024'लागू किया है। इस कानून के तहत पेपर लीक करने या नकल कराने वालों को 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, कनविक्शन दर को सुधारने के लिए अदालतों में फास्ट-ट्रैक सुनवाई और फॉरेंसिक जांच को मजबूत करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।