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कहाँ ले जा रहे हो मुझे? हिरासत में लिए जाने के दौरान पुलिस से उलझे अखिलेश यादव, विपक्षी नेताओं पर भारी बल प्रयोग

 

नई दिल्ली, 21 जुलाई 2026: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में आज उस समय अफरा-तफरी मच गई जब समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया। नीट (NEET) धांधली और युवाओं पर हुए पुलिसिया दमन के खिलाफ प्रधानमंत्री आवास को घेरने पहुंचे अखिलेश यादव को सुरक्षाकर्मियों ने सड़क से उठाकर पुलिस वैन में डाल दिया। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस की और कार्रवाई का कड़ा विरोध किया।

वीडियो में दिखे अखिलेश: "कहाँ ले जा रहे हो मुझे?"

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में सुरक्षाबल पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चारों तरफ से घेरकर ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

  • पुलिस से तीखे सवाल: वीडियो में अखिलेश यादव बेहद आक्रोशित नजर आ रहे हैं और पुलिसकर्मियों से बार-बार पूछ रहे हैं, "कहाँ ले जा रहे हो मुझे?"
  • घसीट कर गाड़ी में बिठाया: प्रदर्शन स्थल को खाली कराने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और दिल्ली पुलिस के जवानों ने नेताओं को जबरन उठाना शुरू किया, जिसमें अखिलेश यादव को घसीटते हुए गाड़ी तक ले जाया गया।
  • थानों में किए गए नजरबंद: सपा प्रमुख और राहुल गांधी को हिरासत में लेने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें किसी अज्ञात स्थान या अलग-अलग थानों में शिफ्ट कर दिया है, जिसकी जानकारी कांग्रेस या सपा नेताओं को भी नहीं दी जा रही है।

युवाओं के हक के लिए राहुल गांधी के साथ आए अखिलेश

यह हाई-वोल्टेज ड्रामा मंगलवार दोपहर को तब शुरू हुआ जब विपक्षी नेता अचानक पार्लियामेंट मार्च के दौरान घायल हुए छात्रों से मिलकर सीधे पीएम आवास पहुंच गए। अखिलेश यादव और राकांपा (शरद पवार) की सुप्रिया सुले जैसी बड़ी हस्तियां इस अचानक हुए धरने में राहुल गांधी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बैठ गईं। विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।

सपा का बड़ा बयान: "यह लोकतंत्र की हत्या है"

अखिलेश यादव की गिरफ्तारी के बाद समाजवादी पार्टी और विपक्षी गुट 'इंडिया' (INDIA) के नेताओं ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया है। सपा प्रवक्ताओं ने कहा कि जब देश का नौजवान अपने भविष्य और पेपर लीक को लेकर सवाल पूछ रहा है, तो सरकार संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष की आवाज को लाठियों और गिरफ्तारियों के दम पर दबाना चाहती है। प्रधानमंत्री आवास के बाहर देश के शीर्ष नेताओं के साथ किया गया यह बर्ताव बेहद शर्मनाक है।