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CJP ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को सौंपी 3 बड़ी मांगें; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का एलान

 

नई दिल्ली, 20 जुलाई 2026
देश की राजधानी में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ चल रहा युवाओं का प्रदर्शन अब और तेज हो गया है। सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में संसद मार्च और भारी तनाव के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से उनके आवास पर मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका कर रहे थे। 

बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए सौरव दास ने बताया कि CJP के नेताओं ने जेपी नड्डा से दो बार मुलाकात की और सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें मजबूती से रखी हैं। 

CJP की 3 मुख्य मांगें:

  1. सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई: जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षक सोनम वांगचुक, जिन्हें पुलिस द्वारा कथित तौर पर हिरासत में लेकर अस्पताल में रखा गया है, उन्हें तुरंत बिना किसी शर्त के रिहा किया जाए।  
  2. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: NEET-UG परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में विफलता की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त किया जाए। सौरव दास ने चेतावनी दी कि जब तक उनका इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। 
  3. पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा: NEET की तैयारी करने वाले उन छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, जिन्होंने मानसिक तनाव के चलते अपनी जान गंवाई है। संगठन का दावा है कि इस तनाव के कारण अब तक 20 से अधिक छात्रों की मौत हो चुकी है। 

बातचीत सौहार्दपूर्ण, पर पीछे हटने को तैयार नहीं युवा

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक करीब 10 मिनट तक चली, जिसके लिए CJP नेताओं को दो घंटे से अधिक का इंतजार करना पड़ा था। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त करने और सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि वे इन मांगों को लेकर सरकार के भीतर आंतरिक स्तर पर चर्चा करेंगे। हालांकि, CJP के रुख से साफ है कि वे सिर्फ आश्वासनों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। जंतर-मंतर और दिल्ली की सड़कों पर हजारों की संख्या में छात्र और युवा डटे हुए हैं और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। इस बैठक के बाद अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार छात्रों के इस बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।