नई दिल्ली:
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने सोमवार (20 जुलाई 2026) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी। दीपके ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भावुक अपील के बाद एक गिलास जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा।
क्यों शुरू हुई थी भूख हड़ताल?
नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। शनिवार (18 जुलाई) को दिल्ली पुलिस ने गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था। वांगचुक को हटाए जाने के तुरंत बाद, आंदोलन को जारी रखने के लिए अभिजीत दीपके खुद अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए थे।
वांगचुक ने की अनशन खत्म करने की अपील
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंग्मो ने जंतर-मंतर के मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वांगचुक का संदेश सुनाया। उन्होंने बताया कि अस्पताल से वांगचुक ने दीपके से अपनी ऊर्जा बचाने और आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अनशन खत्म करने का आग्रह किया है। वांगचुक ने कहा कि संसद मार्च का नेतृत्व करने और छात्रों की आवाज को मजबूत रखने के लिए दीपके का शारीरिक रूप से ऊर्जावान रहना बेहद जरूरी है।
अनशन टूटने के बाद 'संसद चलो' मार्च की शुरुआत
भूख हड़ताल खत्म करने के तुरंत बाद अभिजीत दीपके और गीतांजलि अंग्मो के नेतृत्व में हजारों छात्रों ने संसद की ओर मार्च शुरू कर दिया। इस मार्च में नीट परीक्षा से जुड़ी धांधली के कारण आत्महत्या करने वाली छात्रा रिया कुमारी के पिता भी शामिल हुए। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हुए इस विशाल प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संसद परिसर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और अर्धसैनिक बलों की 32 कंपनियां तैनात की हैं।
बातचीत का रास्ता खुला, पर आंदोलन रहेगा जारी
इसी बीच खबर है कि सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों से संपर्क साधा है। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलकर छात्रों की मांगों पर चर्चा कर सकता है। हालांकि, दीपके ने साफ कर दिया है कि भले ही उनका अनशन खत्म हो गया हो और सरकार से बातचीत का रास्ता खुला हो, लेकिन जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा सुधारों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, युवाओं का यह शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।