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NEET विवाद: जंतर-मंतर पर 23 दिन से जारी AISA छात्रों का आमरण अनशन खत्म, शबाना आजमी और प्रकाश राज की अपील पर माने छात्र

नीट (NEET) परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन एक नए मोड़ पर पहुंच गया है।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्र नेताओं ने 23 दिनों से जारी अपना आमरण अनशन सोमवार (20 जुलाई 2026) को समाप्त कर दिया है। अनुभवी अभिनेत्री शबाना आजमी, अभिनेता प्रकाश राज और विपक्षी सांसदों की भावुक अपील के बाद छात्रों ने जूस पीकर अपना उपवास तोड़ा।दिग्गज हस्तियों और राजनेताओं ने की अपील

जंतर-मंतर पर अनशन स्थल पर पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में राज्यसभा सांसद मनोज झा (RJD), माकपा सांसद अमराराम, भाकपा-माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और अभिनेता शबाना आजमी व प्रकाश राजशामिल थे। 

इस मौके पर शबाना आजमी ने भावुक होते हुए कहा, "एक पीढ़ी के रूप में हम अपनी 'जेन-जी' (Gen Z) के लिए अच्छा करने में विफल रहे हैं, लेकिन आप लोगों ने हमें आगे का रास्ता दिखाया है।" वहीं, योगेंद्र यादव ने कहा कि यह भूख हड़ताल को तोड़ना नहीं है, बल्कि छात्र आंदोलन के इस स्वरूप का निष्कर्ष है। सांसद मनोज झा ने कहा कि छात्रों ने सरकार को हर मोर्चे पर बेनकाब कर एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है।

23 दिन में गिर गया था 12% वजन

अनशन पर बैठे छात्र नेता नेहा, मनीष और आमीन की हालत पिछले कई दिनों से बेहद गंभीर बनी हुई थी। आइसा (AISA) के मुताबिक, लगातार 23 दिनों तक भूखे रहने के कारण तीनों कार्यकर्ताओं ने अपने शरीर का 12 प्रतिशत से अधिक वजन खो दिया था। ब्लड शुगर लेवल खतरनाक रूप से नीचे गिर जाने और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के बावजूद इन छात्रों ने डॉक्टरों की सलाह को दरकिनार कर अपनी आवाज बुलंद रखी थी। 

आंदोलन का अगला चरण: धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ देशव्यापी अभियान

अनशन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन छात्रों और छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि उनकी लड़ाई थमी नहीं है। आइसा ने आंदोलन के अगले चरण की रणनीति का ऐलान करते हुए कहा है कि वे संसद के मानसून सत्र के समानांतर एक महीने का देशव्यापी अभियान शुरू करेंगे

इस आंदोलन के जरिए छात्र संगठन लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग करने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं। विपक्षी सांसदों ने भी छात्रों को भरोसा दिलाया है कि उनकी इन मांगों को आज से ही संसद के भीतर पूरी मजबूती के साथ गूंजने दिया जाएगा।