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भारी बारिश और भूस्खलन से दहल उठा जम्मू-कश्मीर का राजौरी, अब तक 12 लोगों की मौत; सेना और SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

 

राजौरी: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में कुदरत का भयंकर कहर टूटा है। पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और उसके बाद हुए भीषण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन, भारतीय सेना और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

आखिर क्यों राजौरी में मच रही है इतनी तबाही?

भू-वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, राजौरी और उसके आस-पास के पहाड़ी इलाकों में इस कदर तबाही के पीछे चार मुख्य कारण जिम्मेदार हैं:

  • हिमालय के युवा पहाड़: हिमालय दुनिया की सबसे नई और सक्रिय पर्वत श्रृंखला है। युवा होने के कारण इसके पहाड़ अभी भी भूगर्भीय रूप से पूरी तरह स्थिर नहीं हुए हैं।
  • कमजोर और भुरभुरी चट्टानें: राजौरी के पहाड़ी क्षेत्रों की मिट्टी और चट्टानें बेहद कमजोर हैं। भारी बारिश का पानी सोखते ही ये चट्टानें अपनी पकड़ छोड़ देती हैं और भरभराकर गिर जाती हैं।
  • अंधाधुंध जंगलों की कटाई: विकास परियोजनाओं और मानवीय गतिविधियों के कारण पिछले कुछ सालों में यहां बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटा गया है। पेड़ों की जड़ें जो मिट्टी को बांधकर रखती थीं, उनके न होने से भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
  • क्लामेट चेंज (जलवायु परिवर्तन): क्लाइमेट चेंज के कारण मौसम का चक्र पूरी तरह बिगड़ चुका है। कम समय में अत्यधिक और बेहद भारी बारिश (क्लाउडबर्स्ट जैसी स्थिति) होने से पहाड़ों की ढलानें इस दबाव को झेल नहीं पा रही हैं।

मलबे से जिंदगी की तलाश: सेना और SDRF की टीमें तैनात

आपदा की खबर मिलते ही भारतीय सेना और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने मोर्चा संभाल लिया है। प्रभावित इलाकों में सड़कें पूरी तरह बंद हो चुकी हैं, जिससे बचाव कार्य में काफी दिक्कतें आ रही हैं। मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सेना के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों से दूर रहें, क्योंकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक और बारिश होने का अनुमान जताया है।