ईरान के चाबहार पोर्ट पर हमला: भारत के 400 करोड़ के निवेश पर कितना असर, जानिए पूरा मामला
नई दिल्ली: ईरान के रणनीतिक महत्व वाले चाबहार पोर्ट पर हालिया अमेरिकी हमले के बाद भारत के निवेश और इस परियोजना के भविष्य को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। हमले में पोर्ट के मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचने की खबरें आईं, लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत द्वारा संचालित शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है और उसका संचालन सामान्य रूप से जारी है।
भारत ने किया है करीब 400 करोड़ रुपये का निवेश
भारत ने चाबहार पोर्ट के विकास के लिए वित्त वर्ष 2016-17 से 2023-24 के बीच लगभग 400 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस निवेश का उद्देश्य पोर्ट पर आधुनिक उपकरण, क्रेन और कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाना रहा है। यह परियोजना भारत की मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच की रणनीति का अहम हिस्सा मानी जाती है।
क्या हुआ नुकसान?
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी हमले में चाबहार का मैरीटाइम कंट्रोल टावर क्षतिग्रस्त हुआ है, जिसका उपयोग समुद्री यातायात की निगरानी और जहाजों के संचालन के समन्वय के लिए किया जाता था। हालांकि, यह हमला सीधे भारत द्वारा संचालित टर्मिनल पर नहीं हुआ।
भारत पर कितना असर पड़ेगा?
विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत के संचालन वाला टर्मिनल प्रभावित नहीं हुआ है। ऐसे में फिलहाल भारत के निवेश को प्रत्यक्ष नुकसान नहीं माना जा रहा। हालांकि, यदि क्षेत्र में सैन्य तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो समुद्री व्यापार, बीमा लागत और माल ढुलाई पर असर पड़ सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है चाबहार पोर्ट?
चाबहार पोर्ट भारत के लिए इसलिए रणनीतिक है क्योंकि इसके जरिए पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच मिलती है। यह पोर्ट अंतरराष्ट्रीय नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में इसकी बड़ी भूमिका है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो चाबहार परियोजना की गति प्रभावित हो सकती है। फिलहाल भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि पोर्ट पर भारतीय परिचालन सुरक्षित है और व्यापारिक गतिविधियां जारी हैं