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जंतर-मंतर पर आधी रात का क्रैकडाउन: 21वें दिन भूख हड़ताल से जबरन उठाए गए सोनम वांगचुक; संसद मार्च से पहले विपक्ष ने बताया ऑपरेशन ज़ीरो ऑवर

 

 

नई दिल्ली: देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार और नीट (NEET) पेपर लीक घोटाले के खिलाफ राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने शनिवार तड़के जबरन प्रदर्शन स्थल से हटा दिया। बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए पुलिस भारी सुरक्षा बल के साथ सुबह करीब 7 बजे जंतर-मंतर पहुंची और उन्हें एम्बुलेंस के जरिए सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती करा दिया।

पुलिस की इस अचानक की गई कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच भारी तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। आंदोलन का नेतृत्व कर रही 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके को कुछ समय के लिए हिरासत में ले लिया।

कोर्ट के आदेश और स्वास्थ्य का दिया हवाला

नई दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के पदभार संभालते ही पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों और डॉक्टरों की आपातकालीन सलाह के बाद उठाया गया है। 20 दिनों के कड़े उपवास के कारण 59 वर्षीय वांगचुक का वजन करीब 9.5 किलोग्राम घट चुका है और डॉक्टरों ने उनके अंगों के फेल होने (Organ Failure) की आशंका जताई थी। सफदरजंग अस्पताल के मुताबिक, अत्यधिक डिहाइड्रेशन के कारण वह बेहद कमजोर हो चुके हैं, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है।

इधर, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंग्मो ने अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि परिवार और उनके निजी डॉक्टरों की लिखित सहमति के बिना वांगचुक को नस (IV) या मुंह के जरिए जबरन कुछ भी न दिया जाए।

विपक्ष भड़का: बताया 'ऑपरेशन ज़ीरो ऑवर' जैसी पूर्व-कार्रवाई

राजनीतिक गलियारों और सामाजिक हलकों में इस कार्रवाई की तुलना इतिहास के 'ऑपरेशन ज़ीरो ऑवर' (9 अगस्त 1942) से की जा रही है, जब ब्रिटिश सरकार ने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने से पहले ही रात के अंधेरे में महात्मा गांधी और नेहरू समेत सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था।

सोनम वांगचुक ने दो दिन पहले ही घोषणा की थी कि वह आगामी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन छात्रों के साथ 'चलो संसद' मार्च का नेतृत्व करेंगे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस बड़े आंदोलन और संसद घेराव से डर गई थी, इसलिए मानसून सत्र शुरू होने से ठीक दो दिन पहले यह दमनकारी और 'पूर्व-नियोजित' (Pre-emptive) कार्रवाई की गई है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और आम आदमी पार्टी की आतिशी ने इसे "लोकतंत्र की हत्या और तानाशाही" करार दिया है।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

सोनम वांगचुक को हटाए जाने के बावजूद छात्रों का हौसला नहीं टूटा है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और जेएनयू (JNU) के छात्रों ने जंतर-मंतर पर मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन जारी रखा है। कॉकरोच जनता पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके ने रिहा होने के बाद ऐलान किया, - अगर सरकार को लगता है कि वांगचुक सर को हटाने से आंदोलन खत्म हो जाएगा, तो यह उनकी भूल है। अब मैं बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठ रहा हूँ और 20 जुलाई का 'चलो संसद' मार्च हर हाल में निकाला जाएगा।"

छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें:

  1. नीट परीक्षा घोटाले और अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें।
  2. देश की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली और एनटीए (NTA) के ढांचे में व्यापक सुधार किए जाएं।
  3. परीक्षा विवादों और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।