नई दिल्ली/जोधपुर — नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में जोधपुर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम बापू की अंतरिम जमानत याचिका पर शुक्रवार (17 जुलाई 2026) को Supreme Court of India में अहम सुनवाई हुई। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने राजस्थान सरकार को आसाराम की मेडिकल रिपोर्ट की गहन जांच करने और विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
आसाराम के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि उनके मुवक्किल को 'गंभीर आंतरिक रक्तस्राव' (Acute Internal Bleeding) हुआ है, जिसके कारण उन्हें एम्स जोधपुर में भी भर्ती कराया गया था। 90 वर्षीय आसाराम की हालत को चिंताजनक बताते हुए इलाज के लिए कुछ समय की अंतरिम जमानत की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
- अनहोनी से बचना प्राथमिकता: कोर्ट ने कहा कि वह नहीं चाहती कि किसी भी स्तर पर कोई अनहोनी हो या बाद में कोर्ट या सरकार पर कोई दोष आए।
- सख्त मूल्यांकन: पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में जीवन के लिए बेहद गंभीर (High Risk) होगी, तभी बहुत ही सीमित समय के लिए जमानत पर विचार किया जाएगा।
- सरकार पर भरोसा: अदालत ने कहा कि वह जमानत पर कोई भी फैसला लेने से पहले राज्य सरकार द्वारा किए गए स्वास्थ्य मूल्यांकन पर ही भरोसा करेगी।
राजस्थान सरकार की दलील और विरोध
- अयोध्या-काशी यात्रा का हवाला: राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया।
- पूरी तरह फिट होने का दावा: Dainik Jagran के अनुसार, सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि तीन महीने पहले आसाराम ने अयोध्या और काशी विश्वनाथ की यात्रा की थी और वहां वे पैदल चल रहे थे, जिससे वे पूरी तरह फिट नजर आते हैं।
- दवाइयों से इलाज: सरकार ने कहा कि आंतरिक रक्तस्राव गैस्ट्रो समस्या के कारण है, जो एक अस्थायी लक्षण है और जेल प्रशासन की देखरेख में उनका उचित इलाज चल रहा है।
अगली सुनवाई 21 जुलाई को
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को 20 जुलाई तक अपनी विस्तृत मेडिकल असेसमेंट रिपोर्ट जमा करने का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 21 जुलाई 2026 को सूचीबद्ध की गई है, जिसमें तय होगा कि आसाराम को इलाज के लिए अंतरिम राहत मिलेगी या नहीं।
इस मामले के कानूनी घटनाक्रम और पिछले फैसलों की अधिक जानकारी आप Amar Ujala तथा News18 Hindi पर पढ़ सकते हैं।