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बिहार में मानसून के साथ बढ़ा डेंगू का खतरा: स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर, 318 फॉगिंग मशीनें तैनात, जानें क्या हैं जमीनी इंतजाम

बिहार स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई और तैयारियों पर आधारित विस्तृत समाचार लेख:


 

पटना ब्यूरो
बिहार में मानसून की दस्तक के साथ ही जलजमाव के चलते डेंगू का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है. हालांकि, राहत की बात यह है कि इस साल अब तक डेंगू के मामलों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम रही है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक राज्य में 180 से कम मरीज सामने आए हैं, जिनमें से करीब 50 मामले अकेले राजधानी पटना से हैं.

इस राहत के बावजूद नीतीश सरकार का स्वास्थ्य विभाग किसी भी आफ़त या संभावित आउटब्रेक से निपटने के लिए पूरी तरह 'अलर्ट मोड' पर है. स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को तत्काल पुख्ता इंतजाम करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.

जुलाई बना 'एंटी-डेंगू माह', जिलों में महा-अभियान

मच्छरों के बढ़ते लार्वा और संक्रमण के फैलाव को समय रहते रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरे जुलाई महीने को 'एंटी-डेंगू माह' के रूप में मना रहा है. इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर नगर निकायों, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं.

मच्छर नियंत्रण के लिए युद्धस्तर पर फॉगिंग और छिड़काव

  • 318 फॉगिंग मशीनें चालू: मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए पूरे राज्य में 318 हाई-टेक फॉगिंग मशीनें एक्टिव कर दी गई हैं.
  • संवेदनशील जिलों पर नजर: पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, दरभंगा, नालंदा और पश्चिमी चंपारण जैसे हाई-रिस्क जिलों में अतिरिक्त मशीनें और टीमें तैनात की गई हैं.
  • एंटी-लार्वा स्प्रे: जलजमाव वाले हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान कर वहां नियमित रूप से एंटी-लार्वा रसायनों और मैलाथियान कीटनाशकों का बड़े पैमाने पर छिड़काव किया जा रहा है.

अस्पतालों में विशेष वार्ड और जांच किट की व्यवस्था

  • PMCH में 20 बेड का समर्पित वार्ड: राजधानी के प्रमुख पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक में 20 बेड का एक विशेष और पूरी तरह सुसज्जित डेंगू वार्ड तैयार किया गया है. यहाँ मरीजों की सुरक्षा के लिए मच्छरदानी और 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित की गई है.
  • मुफ्त जांच और प्लेटलेट्स प्रबंधन: सभी सरकारी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में NS1 ELISA और IgM ELISA जांच किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दी गई हैं. इसके अलावा गंभीर स्थितियों से निपटने के लिए प्लेटलेट्स और आवश्यक दवाओं का बफर स्टॉक भी मेंटेन किया गया है.
  • प्राइवेट लैब को सख्त निर्देश: स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब्स को भी सख्त हिदायत दी है कि किसी भी डेंगू संदिग्ध या पुष्ट मरीज की जानकारी तुरंत स्थानीय सिविल सर्जन कार्यालय को सौंपें.

डॉक्टरों की अहम सलाह: 'सेल्फ-मेडिकेशन' से बचें

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह और विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की है कि मानसून के दौरान तेज बुखार, जोड़ों या मांसपेशियों में तेज दर्द, सिरदर्द और आंखों के पीछे दर्द जैसे लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिना डॉक्टरों की लिखित सलाह के एस्पिरिन (Aspirin) या इबुप्रोफेन (Ibuprofen) जैसी दर्द निवारक दवाएं कतई न लें, क्योंकि ये डेंगू मरीजों में अंदरूनी ब्लीडिंग (रक्तस्राव) के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देती हैं.

स्वास्थ्य विभाग का साफ तौर पर कहना है कि सरकारी अमला पूरी तरह मुस्तैद है, लेकिन डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब आम लोग भी अपने घरों के आसपास, गमलों, कूलरों और छतों पर साफ पानी जमा न होने दें.