लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण लागू करने और परिसीमन के जरिए उच्च सदन में सीटें बढ़ाने की मांग उठाकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। महिला संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और महिला आरक्षण को जल्द लागू किया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव के इस बयान ने इसलिए भी राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है क्योंकि करीब तीन महीने पहले उन्होंने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर अलग रुख अपनाया था। ऐसे में विपक्षी दल इसे उनका "यू-टर्न" बता रहे हैं, जबकि सपा का कहना है कि पार्टी हमेशा महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के पक्ष में रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को साधने की कोशिश के तहत सपा ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। पिछले कुछ वर्षों में महिला वोटरों की चुनावी भागीदारी लगातार बढ़ी है और सभी दल उन्हें अपने पक्ष में करने की रणनीति बना रहे हैं।
वहीं, परिसीमन के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव का नया बयान चर्चा में है। उन्होंने उच्च सदन में सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि बदलती जनसंख्या और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को देखते हुए इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि सपा चुनावी माहौल को देखते हुए अपने पुराने रुख से पीछे हट रही है। दूसरी ओर, सपा नेताओं का कहना है कि पार्टी की प्राथमिकता महिलाओं और सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व दिलाना है और इसी सोच के तहत यह मांग उठाई गई है।
अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह बदलाव चुनावी रणनीति का हिस्सा है या फिर सपा ने बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए अपने रुख में संशोधन किया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने की संभावना है।