श्रीनगर: सालाना अमरनाथ यात्रा शुरू हुए अभी पहला सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है।
पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग, जिसे श्रद्धालु 'बाबा बर्फानी' के रूप में पूजते हैं, यात्रा के शुरुआती पांच दिनों के भीतर ही लगभग पूरी तरह पिघल गया है। इससे दर्शन के लिए पहुंच रहे भक्तों में मायूसी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का मानना है कि पवित्र हिमलिंग के समय से पहले पिघलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें बढ़ता वैश्विक तापमान (ग्लोबल वार्मिंग), गुफा के भीतर और आसपास बढ़ी मानवीय गतिविधियां, तथा मौसम में हो रहे बदलाव प्रमुख हैं। अधिक संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही और इससे उत्पन्न गर्मी का भी हिमलिंग पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पिछले कुछ वर्षों से यह प्रवृत्ति लगातार देखने को मिल रही है। जानकारों के अनुसार, बीते तीन वर्षों में भी पवित्र हिमलिंग यात्रा की शुरुआत के कुछ ही दिनों बाद तेजी से पिघलता रहा है। इससे प्राकृतिक रूप से बनने वाले इस हिमलिंग के संरक्षण को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
हालांकि, प्रशासन की ओर से अमरनाथ यात्रा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है और श्रद्धालु पवित्र गुफा में पहुंचकर दर्शन-पूजन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमलिंग का आकार और उसकी अवधि हर वर्ष मौसम, तापमान और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को गंभीरता से लेने की जरूरत है, ताकि इस तरह की प्राकृतिक और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।