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तक्षशिला विश्व धरोहर स्थल पर संरक्षण कार्यों पर यूनेस्को की आपत्ति, प्रामाणिकता पर जताई चिंता



इस्लामाबाद: संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने पाकिस्तान के विश्व धरोहर स्थल तक्षशिला में किए गए संरक्षण एवं पुनर्निर्माण कार्यों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। यूनेस्को का कहना है कि संरक्षण के दौरान आधुनिक निर्माण सामग्री और तकनीकों का उपयोग स्मारकों की ऐतिहासिक प्रामाणिकता तथा अखंडता को प्रभावित कर रहा है।


यूनेस्को ने पाकिस्तान सरकार से संबंधित स्थलों पर किए गए विवादित हस्तक्षेपों की समीक्षा करने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने को कहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित मानकों के अनुरूप सुधार नहीं किए गए, तो तक्षशिला को विश्व धरोहर की "खतरे में" सूची (World Heritage in Danger) में शामिल किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

हालांकि, पाकिस्तान के संबंधित पुरातत्व अधिकारियों ने संरक्षण कार्यों का बचाव करते हुए कहा है कि स्मारकों को संरक्षित रखने और क्षति से बचाने के उद्देश्य से ये कदम उठाए गए थे। इसके बावजूद यूनेस्को ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विश्व धरोहर स्थल पर संरक्षण कार्य मूल निर्माण सामग्री, पारंपरिक तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों के अनुरूप ही किए जाने चाहिए।

तक्षशिला दक्षिण एशिया के सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन पुरातात्विक स्थलों में से एक है और वर्ष 1980 से यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यह स्थल प्राचीन गांधार सभ्यता, बौद्ध विरासत और ऐतिहासिक शिक्षा केंद्र के रूप में वैश्विक महत्व रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी ऐतिहासिक पहचान और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखना विश्व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।