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राजस्थान-हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर, 32 साल पुरानी परियोजना को मिली नई रफ्तार

 

नई दिल्ली। राजस्थान की पानी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक को दूर करने की दिशा में सोमवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। नई दिल्ली में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच यमुना जल समझौते (MoA) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के साथ ही करीब 32 वर्षों से लंबित परियोजना को नई गति मिली है और राजस्थान तक यमुना का पानी पहुंचाने का रास्ता लगभग पूरी तरह साफ हो गया है।

यह समझौता दोनों राज्यों की आपसी सहमति और केंद्र सरकार के समन्वय से संपन्न हुआ। इसके तहत यमुना के जल के उपयोग और वितरण को लेकर आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। लंबे समय से लंबित इस परियोजना के साकार होने से राजस्थान के जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना के पूरा होने के बाद राज्य के कई जिलों में पेयजल की उपलब्धता बेहतर होगी, साथ ही सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इससे कृषि उत्पादन बढ़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट कम होने की संभावना है।

राज्य सरकार ने इस समझौते को राजस्थान के जल संसाधनों के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। सरकार का कहना है कि परियोजना के क्रियान्वयन से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और भविष्य में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

करीब तीन दशक तक विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से अटकी रही इस परियोजना के लिए अब दोनों राज्यों की औपचारिक सहमति मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। इससे राजस्थान के जल प्रबंधन और दीर्घकालिक विकास को नई मजबूती मिलने की संभावना है।