25 जून: भारतीय लोकतंत्र के सबसे विवादित अध्याय 'आपातकाल' की बरसी
नई दिल्ली: आज, 25 जून को देश 1975 में लगाए गए आपातकाल की वर्षगांठ को याद कर रहा है। 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi की सलाह पर तत्कालीन राष्ट्रपति Fakhruddin Ali Ahmed ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी। यह अवधि लगभग 21 महीने तक चली और 21 मार्च 1977 को समाप्त हुई।
आपातकाल के दौरान कई मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और बड़ी संख्या में विपक्षी नेताओं तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे चर्चित और विवादित दौरों में से एक माना जाता है।
इस अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार 25 जून को "संविधान हत्या दिवस" के रूप में भी मनाती है, जिसका उद्देश्य आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर पड़े प्रभाव को याद करना बताया गया है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आपातकाल को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला बताते हुए उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने उस दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है, जो नागरिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती के महत्व को रेखांकित करता है। आज भी यह विषय भारतीय राजनीति और लोकतांत्रिक विमर्श का अहम हिस्सा बना हुआ है।