मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इस समय गंभीर जल संकट के मुहाने पर खड़ी है। जून के मध्य तक शहर की प्यास बुझाने वाली सात प्रमुख झीलों का जलस्तर खतरनाक रूप से गिर चुका है। मानसून की धीमी रफ्तार और सामान्य से बेहद कम बारिश ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि जलाशय अब ‘डेथ स्टेज’ के करीब पहुंच गए हैं।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आंकड़ों के अनुसार, शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली सात झीलों में कुल जल भंडारण क्षमता का केवल लगभग 10 प्रतिशत पानी ही शेष रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा भंडार से मुंबई की जरूरतें महज 40 दिनों तक ही पूरी की जा सकती हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए BMC ने कई सख्त कदम उठाए हैं। नए निर्माण स्थलों और स्विमिंग पूलों को पानी की आपूर्ति रोक दी गई है, जबकि औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जल आपूर्ति में 20 प्रतिशत तक कटौती की गई है। पहले से लागू 10 प्रतिशत जल कटौती भी जारी है।
मौसम विभाग के अनुसार महाराष्ट्र में जून के शुरुआती दिनों में सामान्य से लगभग 75 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। आमतौर पर जून के पहले सप्ताह में मुंबई में सक्रिय हो जाने वाला मानसून इस बार काफी पीछे चल रहा है, जिससे झीलों में पानी का स्तर लगातार घटता जा रहा है।
जल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो शहर को और कड़े जल प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ती आबादी और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच यह संकट मुंबई की दीर्घकालिक जल प्रबंधन नीतियों पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
फिलहाल मुंबईवासियों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। उम्मीद सिर्फ एक है—मानसून जल्द दस्तक दे और सूखती झीलों में फिर से जीवन लौट आए।