नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा है कि फुटपाथ और सार्वजनिक सड़कों पर सुरक्षित रूप से चलना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शहरों की सड़कें केवल वाहनों के लिए नहीं बनाई गई हैं, बल्कि उन पर पैदल चलने वालों का भी बराबर और कई मामलों में प्राथमिक अधिकार है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की तेज़ संख्या के कारण पैदल यात्रियों की सुरक्षा लगातार खतरे में पड़ रही है। कई जगहों पर फुटपाथों पर अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और खराब रखरखाव के कारण लोगों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है।
अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार में सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करने का अधिकार भी शामिल है। इसलिए राज्य सरकारों और नगर निकायों की जिम्मेदारी है कि वे फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखें और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करें।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहरों में फुटपाथों की स्थिति की नियमित जांच की जाए और जहां सुधार की आवश्यकता हो, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि सड़क और शहरी विकास योजनाओं में पैदल यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भारत के शहरी ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकता है। लंबे समय से सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता मांग कर रहे थे कि विकास योजनाओं में केवल वाहनों पर नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाए।
इस टिप्पणी को देश में सड़क सुरक्षा और नागरिक अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में लाखों पैदल यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।