नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण पिछले कुछ दिनों से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिससे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि सोमवार सुबह आई एक राहत भरी खबर ने उपभोक्ताओं को उम्मीद की नई किरण दी है।
जानकारी के अनुसार, प्रमुख तेल उत्पादक देशों की ओर से आपूर्ति बनाए रखने और उत्पादन में संभावित वृद्धि के संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में यह रुझान जारी रहता है तो भारत समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी का सीधा असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ता है। तेल कंपनियां वैश्विक कीमतों और अन्य आर्थिक कारकों की समीक्षा करने के बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती पर विचार कर सकती हैं। वहीं रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और अधिक नहीं बढ़ता तथा आपूर्ति श्रृंखला सामान्य बनी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में ईंधन कीमतों में स्थिरता या कमी देखने को मिल सकती है। इससे आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ने वाला बोझ कम होगा और परिवहन लागत में भी राहत मिलेगी।
फिलहाल बाजार की नजरें वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी हुई हैं। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो जल्द ही पेट्रोल, डीजल और LPG उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है।