उज्जैन / भोपाल:
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार को लेकर एक बड़ी जांच रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें उज्जैन में जमीन खरीद से जुड़े गंभीर दावे किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शहर में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और भूमि उपयोग (land-use change) के बीच सीएम के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने 2021 से अब तक करीब 253 एकड़ जमीन खरीदी है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें से बड़ी संख्या में जमीनें उन क्षेत्रों के आसपास स्थित हैं, जहां नई सड़क परियोजनाएं, हाईवे विस्तार और मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य किए जा रहे हैं।
जमीन खरीद और टाइमलाइन पर सवाल
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन की खरीदारी का बड़ा हिस्सा पिछले कुछ वर्षों में हुआ है, जब उज्जैन में विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार की रफ्तार तेज हुई। इसी दौरान जमीन के उपयोग में बदलाव और शहरी विस्तार योजनाओं की भी चर्चा रही।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि परिवार से जुड़े विभिन्न सदस्यों और रियल एस्टेट से जुड़े नेटवर्क के नाम पर कई प्लॉट खरीदे गए हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है और इसे “हितों के टकराव” (conflict of interest) का मामला बताया है। विपक्ष का कहना है कि सरकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं की जानकारी के आधार पर जमीन खरीद से अनुचित लाभ उठाने के आरोप गंभीर हैं।
वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष से जुड़े सूत्रों और अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि परिवार लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा रहा है और इन खरीदों को सीधे मुख्यमंत्री से जोड़ना गलत है।
विकास परियोजनाओं से जुड़ाव का दावा
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जिन इलाकों में जमीन खरीदी गई, वे क्षेत्र उज्जैन के मास्टर प्लान और विकास परियोजनाओं के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं। हालांकि, अभी तक इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
जांच और राजनीतिक प्रतिक्रिया की मांग
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि सरकार ने कहा है कि सभी आरोपों का तथ्यात्मक जवाब दिया जाएगा।