उत्तर प्रदेश | 18 जून 2026
इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम (Muharram) दुनिया भर के मुसलमानों के लिए धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में भी मुहर्रम की शुरुआत इस्लामी नववर्ष (हिजरी नया साल) के रूप में श्रद्धा और शोक दोनों भावनाओं के साथ मनाई जाएगी।
मुहर्रम क्या है?
मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है, जिसे “अल-हिजरी कैलेंडर” भी कहा जाता है। यह कैलेंडर चंद्रमा (चांद) की गति पर आधारित होता है, इसलिए इसके महीने ग्रेगोरियन कैलेंडर से हर साल बदलते रहते हैं।
मुहर्रम को इस्लाम में चार पवित्र महीनों में से एक माना गया है, जिनमें युद्ध और हिंसा वर्जित मानी जाती है।
मुहर्रम का ऐतिहासिक महत्व क्यों है?
मुहर्रम का सबसे बड़ा ऐतिहासिक संबंध 680 ईस्वी में हुई करबला की घटना से है। इस घटना में पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ बलिदान दिया था।
इस घटना की याद में विशेष रूप से मुहर्रम के 10वें दिन, जिसे “आशूरा” कहा जाता है, शिया मुस्लिम समुदाय शोक और मातम मनाता है, जबकि सुन्नी समुदाय इसे उपवास और इबादत के रूप में याद करता है।
मुहर्रम 2026 में क्या होगा खास?
वर्ष 2026 में मुहर्रम की शुरुआत चांद दिखने पर निर्भर करेगी। इस दौरान:
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मस्जिदों में विशेष नमाज और दुआएं की जाएंगी
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ताजिया जुलूस निकाले जाएंगे
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करबला की घटना की याद में मजलिसें होंगी
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लोग शांति, त्याग और सत्य के संदेश को याद करेंगे
क्यों जुड़ा है मुहर्रम से इसका वजूद?
मुहर्रम केवल नया साल नहीं है, बल्कि यह इस्लामिक इतिहास के उस मोड़ को याद करता है जहां न्याय, सच्चाई और बलिदान को सर्वोच्च स्थान दिया गया। यही कारण है कि इसे सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि आध्यात्मिक चिंतन और शोक का महीना माना जाता है।
मुहर्रम 2026 न केवल इस्लामिक नववर्ष की शुरुआत है, बल्कि यह इंसानियत, धैर्य और सत्य के लिए दिए गए बलिदान की याद भी है। यह महीना हर साल लोगों को आत्ममंथन और इंसानियत के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।