लंदन/नई दिल्ली: दुनिया भर में अमीरों का देश छोड़कर दूसरे देशों में जाने का रुझान तेज़ हो गया है। हाल ही में जारी Henley Private Wealth Migration Report 2026 के अनुसार, वर्ष 2026 में लगभग 165,000 (1.65 लाख) करोड़पति अपने मूल देश को छोड़कर दूसरे देशों में बसने की तैयारी में हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में करीब 142,000 करोड़पतियों के देश बदलने का अनुमान था, जबकि 2026 में यह संख्या और बढ़कर 1.65 लाख तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह “वैश्विक वेल्थ माइग्रेशन” अब केवल जीवनशैली का फैसला नहीं रहा, बल्कि टैक्स पॉलिसी, राजनीतिक स्थिरता, हेल्थकेयर और निवेश अवसरों से जुड़ा रणनीतिक कदम बन गया है। अमीर लोग अब अपने पैसे और परिवार की सुरक्षा के लिए अधिक अनुकूल देशों की ओर रुख कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अमेरिका और कुछ यूरोपीय देश अमीरों के लिए प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं, जबकि कुछ बड़े देश लगातार करोड़पतियों का नुकसान झेल रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह रुझान वैश्विक अर्थव्यवस्था और निवेश प्रवाह पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNWI) का पलायन किसी भी देश की टैक्स और निवेश व्यवस्था को प्रभावित करता है।
2026 में करोड़पतियों के देश बदलने की यह रिकॉर्ड संख्या वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।