देश में पहले से ही महंगाई से जूझ रहे आम लोगों को आने वाले महीनों में एक और झटका लग सकता है। डेयरी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि जुलाई और अगस्त के दौरान दूध की कीमतों में 3 से 4 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यदि ऐसा होता है तो घरेलू बजट पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि दूध रोजमर्रा की सबसे जरूरी वस्तुओं में शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे मुख्य कारण जलवायु से जुड़ी परिस्थितियां हैं। अल नीनो जैसी मौसम संबंधी घटनाओं के कारण कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होती है। जब मानसून कमजोर पड़ता है तो इसका सीधा प्रभाव कृषि और पशुपालन दोनों पर पड़ता है। खासतौर पर पशुओं के लिए हरे चारे का उत्पादन घट जाता है, जिससे पशुओं के पोषण और दूध उत्पादन क्षमता पर असर पड़ता है।
इसके अलावा, चारे की उपलब्धता कम होने से उसकी कीमतें भी बढ़ जाती हैं। इससे डेयरी किसानों की उत्पादन लागत बढ़ती है, और अंततः इसका बोझ उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल मानसून की अनिश्चितता ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
डेयरी उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि यदि आने वाले हफ्तों में बारिश सामान्य से कम रहती है, तो दूध की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन कीमतों को और ऊपर ले जा सकता है।
हालांकि सरकार और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन मौसम आधारित इस तरह के बदलावों से पूरी तरह बचाव करना मुश्किल होता है। उपभोक्ताओं के लिए यह समय सावधानी से खर्च करने और विकल्पों पर विचार करने का हो सकता है, क्योंकि आने वाले दिनों में दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।