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अपनी मर्जी से सेक्स वर्क करना गैरकानूनी नहीं; -सुप्रीम कोर्ट

 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा है कि यदि कोई वयस्क व्यक्ति अपनी इच्छा और सहमति से सेक्स वर्क करता है, तो इसे अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत स्वेच्छा से किया गया सेक्स वर्क और मानव तस्करी या जबरन देह व्यापार में स्पष्ट अंतर है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। यह अधिकार सेक्स वर्करों पर भी समान रूप से लागू होता है। केवल पेशे के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता और न ही उसे उसके मौलिक अधिकारों से वंचित किया जा सकता है।

  • सेक्स वर्क लगभग सभी राज्यों और बड़े शहरों में मौजूद है। प्रमुख केंद्रों में Mumbai, Kolkata, Delhi, Bengaluru, Hyderabad और Chennai जैसे बड़े शहर शामिल हैं।
  • विभिन्न अध्ययनों और सरकारी/स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अनुमानों में संख्या अलग-अलग बताई गई है। कुछ पुराने अनुमानों में लगभग 8–9 लाख महिला सेक्स वर्कर्स का उल्लेख है, जबकि 2018–19 के एक राष्ट्रीय अध्ययन में करीब 18.2 लाख महिला सेक्स वर्कर्स का अनुमान लगाया गया था।
  • हाल के एक राष्ट्रीय मैपिंग अध्ययन के अनुसार, देशभर में लगभग 10 लाख महिला सेक्स वर्कर्स का अनुमान लगाया गया और उनकी मौजूदगी सैकड़ों जिलों में दर्ज की गई।

 

 

पुलिस कार्रवाई पर भी टिप्पणी

अदालत ने कहा कि यदि कोई वयस्क व्यक्ति अपनी मर्जी से सेक्स वर्क कर रहा है, तो केवल इसी आधार पर पुलिस द्वारा उत्पीड़न या दंडात्मक कार्रवाई उचित नहीं है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सेक्स वर्करों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनके अधिकारों की रक्षा की जाए।

तस्करी और शोषण पर सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मानव तस्करी, नाबालिगों को देह व्यापार में धकेलना, जबरन वेश्यावृत्ति और किसी भी प्रकार का शोषण गंभीर अपराध हैं। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

गरिमा और अधिकारों की सुरक्षा पर जोर

अदालत ने कहा कि सेक्स वर्करों को भी स्वास्थ्य, सुरक्षा, कानूनी सहायता और सम्मानजनक व्यवहार का अधिकार है। समाज और प्रशासन को उनके प्रति पूर्वाग्रह से बचते हुए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

क्या है कानूनी स्थिति?

भारत में अपनी इच्छा से वयस्कों द्वारा किया गया सेक्स वर्क स्वयं में अवैध नहीं है। हालांकि, देह व्यापार से जुड़ी कुछ गतिविधियां, जैसे दलाली, सार्वजनिक स्थानों पर ग्राहकों की तलाश करना, वेश्यालय चलाना या मानव तस्करी, कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आती हैं।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी सेक्स वर्करों के अधिकारों, गरिमा और कानूनी सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इस विषय पर सामाजिक और कानूनी बहस को नई दिशा मिल सकती है।

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