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नकली पनीर से गंदे गोदाम तक फूड सेफ्टी पर बड़ा एक्शन, लेकिन सवाल सिस्टम सुधरेगा या सख्ती सिर्फ कागजों तक रहेगी?

 

देशभर में खाद्य सुरक्षा को लेकर हाल के दिनों में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों से लेकर अस्वच्छ गोदामों और पैकेजिंग मानकों तक, खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है। अलग-अलग राज्यों में हुई कार्रवाई और नए नियमों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इन कदमों से आम लोगों को सुरक्षित खाना मिलेगा या सख्ती कुछ समय बाद सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगी।

डिलीवरी गोदामों में गंदगी पर कार्रवाई

बेंगलुरु में ऑनलाइन फूड और ग्रोसरी डिलीवरी से जुड़े जोमैटो और जेप्टो के गोदामों में कथित तौर पर साफ-सफाई से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कार्रवाई की। वहीं मुंबई में ब्लिंकइट के एक आउटलेट का लाइसेंस निलंबित किए जाने की खबर ने ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।

ऑनलाइन ग्रोसरी और क्विक-कॉमर्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में ग्राहकों तक पहुंचने से पहले खाद्य उत्पादों के भंडारण और हैंडलिंग की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

पनीर पर राज्यों की सख्ती

महाराष्ट्र में एनालॉग पनीर यानी पनीर जैसे दिखने वाले वैकल्पिक उत्पादों को लेकर भी सख्ती की गई है। राज्य में ऐसे उत्पादों पर एक साल के प्रतिबंध की जानकारी सामने आई है। मध्य प्रदेश में भी इसी तरह के कदम की तैयारी की चर्चा है। इससे खाद्य पदार्थों में मिलावट और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने का मुद्दा फिर सामने आया है।

पान मसाला पैकिंग में बदलाव

खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI की ओर से पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। पैकेजिंग में प्लास्टिक, फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधानों में बदलाव का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा और पैकेजिंग मानकों को बेहतर बनाना है।

हाइजीन ग्रेडिंग और मोबाइल लैब

दिल्ली में रेस्टोरेंट के लिए A से D तक हाइजीन ग्रेडिंग की व्यवस्था शुरू किए जाने से ग्राहकों को साफ-सफाई के स्तर की जानकारी मिलने की उम्मीद है। वहीं स्कूलों के मेन्यू में इडली-सांभर जैसे पौष्टिक विकल्पों को शामिल करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

हरियाणा में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के जरिए कम लागत में खाद्य पदार्थों की जांच की पहल भी की जा रही है। इससे मिलावट की जांच को छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

असली चुनौती अमल की

इन सभी कदमों से यह संकेत जरूर मिलता है कि देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। लेकिन असली चुनौती नियम बनाने से ज्यादा उनके लगातार और प्रभावी पालन की है। नियमित निरीक्षण, तेज कार्रवाई, पारदर्शी जांच और दोषी पाए जाने वालों पर प्रभावी दंड ही यह तय करेगा कि फूड सेफ्टी की सख्ती वास्तव में जमीन पर कितनी असरदार साबित होती है।

आखिर सवाल सिर्फ नकली पनीर या गंदे गोदाम का नहीं, बल्कि हर नागरिक की थाली तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाना पहुंचाने का है।

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