नई दिल्ली: ग्रामीण रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा की जगह लागू की गई VB-G RAM G योजना के शुरुआती आंकड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। योजना के पहले ही महीने में रोजगार सृजन की रफ्तार पिछले साल की तुलना में काफी कम रही। जुलाई 2026 में इसके तहत 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार सृजित हुआ, जबकि जुलाई 2025 में मनरेगा के तहत 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार दिया गया था।
आंकड़ों के मुताबिक, नई योजना के पहले महीने में ग्रामीण रोजगार सृजन में करीब 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यानी पिछले साल जुलाई में मनरेगा के जरिए जितना रोजगार पैदा हुआ था, उसके मुकाबले इस साल नई योजना के तहत लगभग आधा ही रोजगार उपलब्ध हो सका।
रोजगार के मोर्चे पर शुरुआती झटका
मनरेगा लंबे समय से ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराने वाली प्रमुख योजना रही है। ऐसे में नई VB-G RAM G योजना के लागू होने के बाद पहले महीने के आंकड़े इसकी शुरुआती कार्यप्रणाली और रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता को लेकर चर्चा बढ़ा सकते हैं।
जुलाई में 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार का आंकड़ा बताता है कि योजना के शुरुआती चरण में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन की गति पिछले साल के मुकाबले काफी धीमी रही।
15.33 करोड़ से सीधे 7.67 करोड़
तुलना करें तो जुलाई 2025 में मनरेगा के तहत 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिन रोजगार सृजित हुआ था। वहीं जुलाई 2026 में VB-G RAM G के तहत यह आंकड़ा घटकर 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिन रह गया।
इस तरह करीब 7.66 करोड़ व्यक्ति-दिन का अंतर सामने आया। प्रतिशत के लिहाज से यह लगभग 50 फीसदी की कमी है।
आगे के महीनों पर रहेगी नजर
नई योजना के पहले महीने के आंकड़ों के बाद अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले महीनों में रोजगार सृजन की रफ्तार किस तरह रहती है। सरकार के सामने ग्रामीण इलाकों में रोजगार की मांग को पूरा करने और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की चुनौती होगी।
अगर आने वाले महीनों में भी रोजगार सृजन के आंकड़े पुराने मनरेगा स्तर से काफी नीचे रहते हैं, तो नई योजना की प्रभावशीलता और ग्रामीण मजदूरों को मिलने वाले रोजगार के अवसरों को लेकर सवाल और तेज हो सकते हैं।