रांची: झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार सरकार के आश्वासन के बाद बड़े फैसले की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों पर सरकार ने सहमति जताई है। इसके तहत परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की जांच कराने की बात सामने आई है।
छात्र लंबे समय से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे थे। अभ्यर्थियों का आरोप था कि परीक्षा में पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिसके बाद उन्होंने परीक्षा रद्द करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
90 दिनों में जांच पूरी करने का दावा
आंदोलन के बीच सरकार की ओर से छात्रों को जांच का भरोसा दिया गया है। बताया जा रहा है कि मामले की जांच CID और ED की ओर से की जाएगी और इसे तय समयसीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जांच के जरिए परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
छात्रों की मांगों के आगे सरकार ने बदला रुख
JPSC परीक्षा को लेकर रांची में छात्रों का विरोध लगातार तेज हो रहा था। धरना-प्रदर्शन के साथ अभ्यर्थियों ने सरकार पर दबाव बढ़ाया। आखिरकार सरकार और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद परीक्षा रद्द करने और जांच की मांग पर कार्रवाई का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।
आंदोलन का दिखा असर
JPSC विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन अब झारखंड की राजनीति में भी चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है। ऐसे में निष्पक्ष जांच और दोबारा परीक्षा कराना जरूरी है।
फिलहाल सरकार के फैसले के बाद अभ्यर्थियों की नजर अब आधिकारिक आदेश, परीक्षा रद्द करने की प्रक्रिया और CID-ED जांच की शुरुआत पर टिकी है। अगर यह फैसला औपचारिक रूप से लागू होता है तो 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हजारों अभ्यर्थियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।