नई दिल्ली: सावन का महीना आते ही राजधानी दिल्ली का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। हल्की-हल्की बारिश, हरियाली, मंदिरों में शिवभक्तों की भीड़ और त्योहारों की रौनक के बीच एक मिठाई ऐसी है, जिसकी मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है
घेवर दिल्ली की मिठाई की दुकानों पर इन दिनों सादा, मलाई, मावा और ड्राई फ्रूट घेवर खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
घेवर मूल रूप से राजस्थान की पारंपरिक मिठाई है, लेकिन समय के साथ यह दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में सावन और तीज का प्रतीक बन चुकी है। हरियाली तीज, रक्षाबंधन और सावन के अन्य त्योहारों पर लोग इसे अपने परिवार और रिश्तेदारों को उपहार के रूप में भी देते हैं।
दिल्ली का सुहावना मानसूनी मौसम भी घेवर की लोकप्रियता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। बारिश के बीच परिवार के साथ गर्म चाय और ताज़े घेवर का स्वाद लोगों को खास अनुभव देता है। यही वजह है कि सावन शुरू होते ही शहर की लगभग हर मशहूर मिठाई की दुकान पर घेवर की बिक्री तेज़ हो जाती है।
सावन केवल मिठाइयों का ही नहीं, बल्कि आस्था का भी महीना है। दिल्ली के प्रमुख शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे धार्मिक और उत्सवपूर्ण माहौल में घेवर लोगों की थाली और त्योहार दोनों का अहम हिस्सा बन जाता है।
क्यों खास है सावन में घेवर?
- सावन और तीज की पारंपरिक मिठाई मानी जाती है।
- मानसून के मौसम में इसका स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है।
- रिश्तेदारों और दोस्तों को उपहार में देने की परंपरा है।
- दिल्ली की मिठाई की दुकानों पर इन दिनों इसकी सबसे अधिक मांग रहती है।
यही कारण है कि सावन की फुहारों और दिल्ली के सुहाने मौसम के साथ घेवर का स्वाद लोगों के उत्सव को और भी यादगार बना देता है।