नई दिल्ली/लेह: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक दिल्ली में छात्रों के समर्थन में चले आंदोलन और 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद अपने गृह क्षेत्र लेह-लद्दाख पहुंच गए हैं। गांव पहुंचने के बाद जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने लोगों से राजनीति को लेकर संतुलित सोच अपनाने की अपील की और कहा कि किसी भी दल या नेता का अंधभक्त बनने के बजाय सही और गलत का निष्पक्ष आकलन करना चाहिए।
वांगचुक ने कहा कि हाल ही में उन्होंने कश्मीर यात्रा के दौरान वंदे भारत एक्सप्रेस और चेनाब रेल पुल की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी। इसके बाद कुछ लोगों ने उनकी आलोचना करते हुए इसे सरकार का समर्थन बताया। इस पर उन्होंने कहा कि किसी अच्छे काम की तारीफ करना राजनीतिक समर्थन नहीं होता।
उन्होंने कहा कि यदि कोई संस्था या सरकार देश के हित में अच्छा कार्य करती है तो उसकी सराहना होनी चाहिए, और यदि कोई गलती होती है तो उसकी आलोचना भी की जानी चाहिए। उनके अनुसार लोकतंत्र में नागरिकों को स्वतंत्र सोच रखनी चाहिए और किसी भी विचारधारा के अंध समर्थन से बचना चाहिए।
सोनम वांगचुक ने कहा कि देश का निर्माण केवल सत्ता पक्ष या विपक्ष अकेले नहीं कर सकता। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब नागरिक तथ्यों के आधार पर निर्णय लें और हर मुद्दे को निष्पक्ष नजरिए से देखें।
उन्होंने केंद्र सरकार को आंदोलन के दौरान दिए गए लिखित आश्वासनों की भी याद दिलाई। वांगचुक ने कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने, परीक्षा सुधारों पर चर्चा करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का भरोसा दिया था। अब इन वादों को समय पर लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने NEET परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग भी दोहराई। वांगचुक ने कहा कि ऐसे परिवारों को न्याय और सहायता मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने अपने संदेश में यह भी कहा कि किसी भी फैसले का महत्व तभी होता है जब उसे समय पर लागू किया जाए। यदि वादों को लंबे समय तक टाल दिया जाए तो उनका उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार अपने सभी आश्वासनों को जल्द पूरा करेगी।