नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन अधिनियम, 2026 अब आधिकारिक रूप से कानून बन गया है। इस कानून का उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और संगठित परीक्षा माफिया पर तेज और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया। ऐसे मामलों में लंबी जांच और वर्षों तक चलने वाली अदालती प्रक्रिया के कारण दोषियों को समय पर सजा नहीं मिल पाती थी। नए कानून के जरिए इसी व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की कोशिश की गई है।
नए कानून के अनुसार देश के प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे। इन अदालतों में मामलों की नियमित सुनवाई होगी और लक्ष्य रखा गया है कि ट्रायल 90 दिनों के भीतर पूरा कर फैसला सुनाया जाए। इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों में तेजी आने की उम्मीद है।
जांच प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाया गया है। पहले पेपर लीक मामलों की जांच पूरी करने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं थी, लेकिन अब विशेष जांच दल (Special Task Force) को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। इसके बाद आरोप पत्र दाखिल कर मामले को सीधे फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा जाएगा।
सरकार ने सजा के प्रावधान भी पहले की तुलना में काफी कठोर कर दिए हैं। पुराने कानून में तीन से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान था, जबकि संशोधित कानून के तहत दोषियों को पांच से दस वर्ष तक की कैद हो सकती है। इसके साथ ही आर्थिक दंड भी कई गुना बढ़ा दिया गया है। पहले अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता था, जबकि अब गंभीर मामलों में 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
केंद्र सरकार का मानना है कि पेपर लीक केवल कुछ व्यक्तियों का अपराध नहीं, बल्कि कई राज्यों में सक्रिय संगठित नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है। ऐसे नेटवर्क में परीक्षा केंद्र संचालक, तकनीकी विशेषज्ञ, बिचौलिये और अन्य लोग शामिल हो सकते हैं। इसलिए संशोधित कानून में पूरे नेटवर्क को निशाना बनाने का प्रावधान किया गया है, ताकि केवल प्रश्नपत्र लीक करने वाले ही नहीं, बल्कि साजिश में शामिल सभी लोगों पर कार्रवाई हो सके।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार नए कानून का उद्देश्य केवल सजा बढ़ाना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता स्थापित करना भी है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से युवाओं का विश्वास मजबूत होगा और प्रतियोगी परीक्षाओं में ईमानदार अभ्यर्थियों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा।
विपक्ष और विभिन्न छात्र संगठनों ने भी पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून की आवश्यकता स्वीकार की है, हालांकि कई नेताओं ने यह भी कहा है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। उनका मानना है कि परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करने, डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने और परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया में सुधार लाना भी उतना ही जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कानून का प्रभावी तरीके से पालन किया गया, जांच समय पर पूरी हुई और फास्ट ट्रैक अदालतें निर्धारित समय-सीमा में फैसले सुनाने लगीं, तो आने वाले वर्षों में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।