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PM मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा की ग्लोबल टीम तलब, एल्गोरिदम में पक्षपात पर केंद्र के तीखे सवाल

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। केंद्र सरकार ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए मेटा (META) की ग्लोबल टीम को स्पष्टीकरण के लिए तलब किया है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक वीडियो हटाए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम, कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली और डिजिटल प्लेटफॉर्म की निष्पक्षता से भी जुड़ा हुआ है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में सरकार मेटा से यह जानना चाहती है कि आखिर किन मानकों और किस प्रक्रिया के तहत प्रधानमंत्री का वीडियो हटाया गया। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि क्या कंटेंट मॉडरेशन के दौरान किसी प्रकार का एल्गोरिदमिक पक्षपात (Algorithmic Bias) हुआ या फिर यह निर्णय किसी स्वचालित प्रणाली की वजह से लिया गया।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं है। ऐसे प्लेटफॉर्म लोकतांत्रिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं, इसलिए उनसे पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी सार्वजनिक पदाधिकारी या सरकारी संस्थान से जुड़ी सामग्री हटाई जाती है, तो उसके पीछे स्पष्ट कारण और प्रक्रिया होना आवश्यक है।

बैठक के दौरान अधिकारियों द्वारा मेटा से कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फिल्टरिंग, मानव समीक्षा प्रक्रिया और अपील तंत्र के बारे में भी विस्तृत जानकारी मांगे जाने की संभावना है। सरकार यह भी समझना चाहती है कि भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश में प्लेटफॉर्म किस प्रकार स्थानीय कानूनों और नीतियों का पालन करता है।

सूत्रों का कहना है कि सरकार इस बात की भी समीक्षा करेगी कि क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम कुछ विशेष प्रकार की सामग्री को प्राथमिकता देता है या कुछ कंटेंट के साथ भेदभाव करता है। यदि एल्गोरिदमिक पक्षपात के संकेत मिलते हैं, तो सरकार भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी करने पर भी विचार कर सकती है।

सरकार की चिंता केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी खबरों, गलत सूचना, डीपफेक, भ्रामक सामग्री और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि बड़ी टेक कंपनियां अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाएं और उपयोगकर्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी दें कि किसी पोस्ट या वीडियो पर कार्रवाई क्यों की गई।

डिजिटल नीति से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि एल्गोरिदम की पारदर्शिता आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रही है। यूरोप, अमेरिका और भारत सहित कई देश बड़ी टेक कंपनियों से यह अपेक्षा कर रहे हैं कि वे अपने कंटेंट मॉडरेशन मॉडल और एल्गोरिदमिक निर्णयों को अधिक जवाबदेह बनाएं।

मेटा की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है। माना जा रहा है कि कंपनी सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखेगी और वीडियो हटाए जाने के पीछे की तकनीकी एवं नीतिगत प्रक्रिया की जानकारी साझा करेगी।

सरकार और मेटा के बीच होने वाली यह बैठक डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कंटेंट मॉडरेशन और एल्गोरिदमिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर आगे की नीति निर्माण के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके निष्कर्ष भविष्य में सोशल मीडिया कंपनियों के संचालन और नियामकीय ढांचे को भी प्रभावित कर सकते हैं।

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