नई दिल्ली। राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge ने विधेयक को लेकर सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए और कहा कि नया बिल अभी भी अधूरा है तथा इसमें छात्रों की सभी चिंताओं का समाधान नहीं किया गया है।
खरगे ने कहा कि सरकार जनता और युवाओं के बढ़ते दबाव के कारण इस संशोधन विधेयक को लाने के लिए मजबूर हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लंबे समय तक छात्रों की आवाज को नजरअंदाज किया और अब कुर्सी बचाने के लिए यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को अंततः सरकार को स्वीकार करना पड़ा।
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान खरगे ने कहा कि छात्र सरकार से संवाद चाहते थे, लेकिन उन्हें लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा। उन्होंने छात्रों के साथ हुई घटनाओं पर दुख जताते हुए कहा कि वह उनके जख्म देखकर शर्मसार हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को परिस्थितियों के दबाव में अपने ही एक प्रमुख पदाधिकारी को हटाना पड़ा।
खरगे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बंद कमरों में बैठकर जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता तथा जवाबदेही जरूरी है।
वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से Jagat Prakash Nadda ने खरगे को जवाब देते हुए कहा कि उन्हें तथ्यों और तर्कों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संशोधन विधेयक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राज्यसभा में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। परीक्षा प्रणाली में सुधार, छात्रों के हितों की सुरक्षा और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक को लेकर सरकार और विपक्ष ने अपने-अपने पक्ष मजबूती से रखे। अब इस विधेयक पर आगे की संसदीय प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।