देश में जलवायु परिवर्तन और बदलते मौसम के कारण कई पुरानी फसलों की देसी किस्में धीरे-धीरे खत्म होती जा रही हैं। इन्हें बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक देसी बीजों को सुरक्षित रखना और किसानों को फिर से इनकी खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।
सरकार ने देशभर में 1 लाख से अधिक देसी बीजों को सुरक्षित रखने की पहल की है। इन बीजों में धान, गेहूं, बाजरा, दालें और कई पारंपरिक फसलों की पुरानी किस्में शामिल हैं। माना जाता है कि ये देसी बीज बदलते मौसम, सूखा और कई बीमारियों का बेहतर सामना कर सकते हैं।
इस अभियान के तहत ऐसे किसानों को भी सम्मानित किया जाएगा, जो वर्षों से देसी बीजों को संभालकर रख रहे हैं और उनकी खेती कर रहे हैं। इससे किसानों को अपनी पारंपरिक खेती बचाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए देश की कृषि विरासत सुरक्षित रहेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि देसी बीजों के संरक्षण से खेती अधिक टिकाऊ बनेगी, रासायनिक खेती पर निर्भरता कम होगी और किसानों को लंबे समय में बेहतर लाभ मिल सकता है। सरकार का यह कदम खेती, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा—तीनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।