नई दिल्ली। जलवायु कार्यकर्ता और सामाजिक चिंतक सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन अनशन 26वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान उन्होंने अपने समर्थकों और आंदोलन में शामिल लोगों से एक बार फिर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसका अनुशासन और अहिंसक स्वरूप होता है, इसलिए किसी भी प्रकार की हिंसा या टकराव से बचना आवश्यक है।
वांगचुक ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ असामाजिक तत्व आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका उद्देश्य प्रदर्शन को हिंसक बनाकर इसकी मूल भावना को कमजोर करना है। उन्होंने आंदोलनकारियों से कहा कि यदि कोई उकसाने की कोशिश करे, तो उसका जवाब हिंसा से नहीं बल्कि शांति और संयम से दिया जाए।
उन्होंने अपने संदेश में महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि विरोध का सबसे प्रभावी तरीका शांतिपूर्ण प्रतिरोध है। उन्होंने कहा कि यदि कोई पत्थर फेंके तो जवाब पत्थर से नहीं, बल्कि "फूलों" से दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ संघर्ष नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य की रक्षा करना है।
वांगचुक ने कहा कि आंदोलन में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करे और किसी भी अफवाह या भड़काऊ गतिविधि से दूरी बनाए रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और आंदोलन की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए अनुशासन का पालन करें। उनके अनुसार, यदि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा तो समाज और सरकार दोनों तक उसकी बात अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगी।
सोनम वांगचुक ने यह भी कहा कि उनका अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सार्थक समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं होती। उन्होंने भरोसा जताया कि शांतिपूर्ण जनआंदोलन लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और इसी रास्ते से सकारात्मक बदलाव संभव है।