वायुसेना से रिटायरमेंट के कुछ महीनों बाद मिली अहम जिम्मेदारी, राम मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार बनाया CEO का पद
अयोध्या। राम मंदिर के निर्माण के बाद अब उसके प्रशासन और प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राम मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाया है और इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए वायुसेना के पूर्व अधिकारी जितेंद्र मिश्र को चुना गया है। मिश्र की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह हाल ही में वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण सैन्य जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
1. ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्र ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली थी। इस सैन्य अभियान के दौरान उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया। अभियान में योगदान के लिए उन्हें सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किए जाने की बात सामने आई है। सैन्य क्षेत्र में उनका अनुभव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता उनकी नियुक्ति की प्रमुख वजहों में मानी जा रही है।
2. बड़े स्तर के प्रबंधन का अनुभव
राम मंदिर अब केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाला विशाल परिसर बन चुका है। यहां सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, सुविधाओं, कर्मचारियों, प्रशासन और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी कई जिम्मेदारियां हैं। वायुसेना में वरिष्ठ स्तर पर काम करने का जितेंद्र मिश्र का अनुभव ऐसे बड़े प्रशासनिक ढांचे को संभालने में उपयोगी माना जा रहा है।
3. अनुशासन और संकट प्रबंधन की क्षमता
वायुसेना में लंबे समय तक जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी के तौर पर जितेंद्र मिश्र को अनुशासन, त्वरित निर्णय और संकट प्रबंधन का अनुभव है। राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा CEO का पद बनाए जाने का उद्देश्य भी मंदिर से जुड़े बढ़ते प्रशासनिक कामकाज को एक पेशेवर और केंद्रीकृत व्यवस्था देना माना जा रहा है।
बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच नई भूमिका
राम मंदिर परिसर के विस्तार और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में ट्रस्ट को एक ऐसे अधिकारी की जरूरत थी, जिसे बड़े संस्थागत ढांचे, सुरक्षा और प्रबंधन का अनुभव हो। वायुसेना से रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों बाद जितेंद्र मिश्र को मिली यह जिम्मेदारी इसी बदलते प्रशासनिक ढांचे की ओर संकेत करती है।