कानपुर: मच्छर आखिर किसी एक व्यक्ति को ज्यादा क्यों काटते हैं और दूसरे को छोड़ देते हैं? क्या इसके पीछे सिर्फ शरीर की गर्मी या खून है, या मच्छर इंसान की पहचान उसकी गंध से भी करते हैं? इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए IIT कानपुर में वैज्ञानिक एक महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं।
यह रिसर्च मेहता फैमिली सेंटर फॉर इंजीनियरिंग इन मेडिसिन में प्रोफेसर नितिन गुप्ता की लैब में की जा रही है। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि मच्छर इंसानों तक पहुंचने के लिए उनकी गंध और शरीर से निकलने वाले अलग-अलग रासायनिक संकेतों को किस तरह महसूस करते हैं।
गंध से इंसान की पहचान?
मच्छरों के लिए इंसान तक पहुंचने में गंध एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। अलग-अलग लोगों के शरीर से निकलने वाली गंध में अंतर होता है। यही अंतर मच्छरों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। शोधकर्ताओं का लक्ष्य यह समझना है कि मच्छर किन गंधों की ओर आकर्षित होते हैं और किनसे दूरी बनाते हैं।
बीमारी रोकने में मिल सकती है मदद
इस शोध का महत्व सिर्फ यह जानने तक सीमित नहीं है कि मच्छर किसे ज्यादा काटते हैं। मच्छर डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के प्रसार में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके व्यवहार और इंसानों की ओर आकर्षित होने की प्रक्रिया को समझने से भविष्य में मच्छरों से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के नए तरीके विकसित करने में मदद मिल सकती है।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि मच्छरों की पसंद-नापसंद के पीछे छिपे जैविक और रासायनिक संकेतों को समझकर भविष्य में ऐसे उपाय विकसित किए जा सकेंगे, जिनसे मच्छरों को इंसानों तक पहुंचने से रोका जा सके।