Latest News Lifestyle
रामजन्मभूमि ट्रस्ट में चंपत राय की वापसी पर आज फैसला


अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को होने वाली अहम बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। श्रीमणिराम जी की छावनी में दोपहर 2 बजे से प्रस्तावित इस बैठक में ट्रस्ट से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है। इनमें सबसे प्रमुख मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO के चयन की प्रक्रिया को पूरा करना और ट्रस्ट डीड यानी न्यास विलेख तथा ट्रस्ट की नियमावली में संशोधन पर विचार करना शामिल है।

बैठक से ठीक पहले ट्रस्ट डीड में प्रस्तावित बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ट्रस्ट की ओर से बताया गया है कि अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन के प्रस्ताव पर डीड में संशोधन किया जाएगा। हालांकि, संशोधन में किन प्रावधानों को बदला जाएगा, इसकी पूरी तस्वीर बैठक में प्रस्ताव सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

इसी बीच अयोध्या में एक अहम सवाल चर्चा के केंद्र में है कि क्या प्रस्तावित नियमों में बदलाव के जरिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की वापसी का रास्ता तैयार किया जा सकता है?

 चंपत राय की वापसी को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा?

चंपत राय लंबे समय तक राम मंदिर आंदोलन और उसके बाद मंदिर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। ट्रस्ट में महासचिव के तौर पर भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। ऐसे में उनके ट्रस्ट से बाहर होने के बाद उनकी संभावित वापसी को लेकर संत समाज और राम मंदिर से जुड़े लोगों के बीच लगातार चर्चा होती रही है।

अब ट्रस्ट डीड और नियमावली में संशोधन की खबर सामने आने के बाद इस चर्चा को और बल मिला है। माना जा रहा है कि अगर नए नियमों में किसी सदस्य के त्यागपत्र देने के बाद दोबारा नियुक्ति या वापसी से जुड़ा प्रावधान शामिल किया जाता है, तो भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया स्पष्ट हो सकती है।

हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित संशोधन का सीधा संबंध चंपत राय की वापसी से है या नहीं। ट्रस्ट की बैठक में प्रस्ताव और उस पर होने वाली चर्चा के बाद ही स्थिति साफ होगी।

 नए नियमों में क्या हो सकता है बदलाव?

ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों और चर्चा के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों में ट्रस्टियों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा किसी सदस्य द्वारा त्यागपत्र देने के बाद उसकी संभावित पुनर्वापसी से संबंधित प्रावधान भी जोड़े जाने की संभावना जताई जा रही है।

एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति को ट्रस्ट की ओर से औपचारिक रूप से अंगीकार करने से जुड़ा हो सकता है। इससे ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में CEO की भूमिका और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता आने की उम्मीद है।

हालांकि, इन सभी बिंदुओं पर अंतिम जानकारी बैठक में प्रस्ताव रखे जाने और ट्रस्टियों की चर्चा के बाद ही सामने आएगी।

 संत समाज में चंपत राय के समर्थन की चर्चा

अयोध्या के कई संत-महंत पहले ही चंपत राय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके समर्थन में अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। उनका मानना है कि राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक चंपत राय ने लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

ट्रस्ट की धर्म समिति से जुड़े राजकुमार दास का कहना है कि चंपत राय की भूमिका मंदिर आंदोलन से लेकर निर्माण कार्य तक महत्वपूर्ण रही है। उनका कहना है कि यदि संबंधित जांच में चंपत राय का नाम नहीं है, तो ट्रस्ट में उनकी वापसी पर विचार किया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, यदि वापसी के लिए नियमों में किसी तरह की स्पष्टता की जरूरत है तो ट्रस्ट को इस दिशा में नियम बनाने में देरी नहीं करनी चाहिए। हालांकि, अंतिम निर्णय ट्रस्ट के स्तर पर प्रस्ताव और नियमों के मुताबिक ही होगा।

### स्थानीय साधु-संतों की भूमिका पर भी जोर

वशिष्ठ पीठाधीश्वर महंत राघवेशदास वेदांती ने ट्रस्ट डीड में संशोधन को सकारात्मक संकेत बताया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट की व्यवस्था में स्थानीय साधु-संतों की भूमिका और प्राथमिकता को भी पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए।

उन्होंने भी चंपत राय की वापसी पर विचार किए जाने की बात कही है। उनका तर्क है कि यदि संबंधित जांच रिपोर्ट में चंपत राय का नाम नहीं है तो उनकी भूमिका को लेकर दोबारा विचार किया जा सकता है।

इससे संकेत मिलता है कि प्रस्तावित संशोधन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि ट्रस्ट की भविष्य की कार्यप्रणाली और सदस्यों की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

 ट्रस्ट डीड क्या होती है?

ट्रस्ट डीड एक कानूनी दस्तावेज होता है, जिसके माध्यम से किसी ट्रस्ट की स्थापना और उसकी कार्यप्रणाली से जुड़े नियम निर्धारित किए जाते हैं। इसमें ट्रस्ट के उद्देश्य, सदस्यों की भूमिका, संपत्ति के प्रबंधन और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना राम मंदिर से जुड़े निर्माण और प्रबंधन के लिए की गई थी। इसका पंजीकरण दिल्ली में किया गया था।

अब यदि ट्रस्ट डीड में संशोधन किया जाता है तो उसमें मौजूद प्रावधानों के अनुसार ही प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संशोधन का वास्तविक उद्देश्य क्या है और किन धाराओं या नियमों में बदलाव किया जाएगा, यह ट्रस्ट की बैठक में प्रस्ताव सामने आने के बाद स्पष्ट होगा।

 सदस्यों की नियुक्ति और वापसी का मुद्दा

ट्रस्ट डीड में सदस्यों की नियुक्ति, त्यागपत्र और दोबारा नियुक्ति से संबंधित स्पष्ट प्रावधानों को लेकर भी चर्चा हो रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पाठक के अनुसार, यदि किसी सदस्य के हटने या नियुक्त होने की प्रक्रिया डीड में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है तो नियमों में इस संबंध में स्पष्टता लाना महत्वपूर्ण हो सकता है।

उनका कहना है कि जिस तरह किसी सदस्य का त्यागपत्र स्वीकार करने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था, उसी तरह किसी सदस्य की दोबारा बहाली के लिए भी प्रस्ताव का रास्ता अपनाया जा सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया का विस्तृत कानूनी आधार ट्रस्ट डीड में स्पष्ट होना जरूरी है।

यही वजह है कि प्रस्तावित संशोधन को लेकर कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है।

 CEO का चयन भी बैठक का अहम एजेंडा

चंपत राय से जुड़े मुद्दे के अलावा बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी। ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए CEO की भूमिका अहम मानी जाती है।

बैठक में CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने और ट्रस्ट की ओर से उसे अंगीकार करने से संबंधित प्रावधान पर भी चर्चा होने की संभावना है। इससे ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में जिम्मेदारियों और अधिकारों को लेकर स्पष्टता आ सकती है।

 विहिप के एक धड़े की भी नजर

विश्व हिंदू परिषद से जुड़े एक बड़े धड़े की ओर से भी चंपत राय को मंदिर संचालन से जोड़े रखने की इच्छा की चर्चा सामने आती रही है। राम मंदिर आंदोलन में लंबे समय तक सक्रिय रहे चंपत राय की संगठनात्मक भूमिका को देखते हुए उनके समर्थक उनकी वापसी की संभावना को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति की ट्रस्ट में वापसी केवल सार्वजनिक समर्थन या मांग के आधार पर नहीं होगी। इसके लिए ट्रस्ट के नियम, डीड के प्रावधान और बैठक में लिए जाने वाले निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।

 आज की बैठक से साफ होगी तस्वीर

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रस्ट डीड में वास्तव में किन नियमों में बदलाव किया जाता है और क्या उसमें पूर्व सदस्यों की पुनर्वापसी से जुड़ा कोई प्रावधान शामिल किया जाता है। अगर ऐसा प्रावधान आता है तो चंपत राय की वापसी को लेकर आगे की प्रक्रिया का रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि चंपत राय की ट्रस्ट में वापसी तय हो गई है। बैठक में प्रस्ताव सामने आने, उस पर चर्चा होने और ट्रस्टियों की सहमति के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

बैठक में CEO का चयन, ट्रस्ट डीड में संशोधन, सदस्यों की नियुक्ति और पुनर्वापसी से जुड़े नियम तथा ट्रस्ट की भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था जैसे मुद्दे अहम रहेंगे। अयोध्या के संत समाज और राम मंदिर से जुड़े लोगों की नजर भी इसी बैठक के फैसलों पर टिकी हुई है।
 

News Image

भारत मंडपम में पीएम मोदी और पुतिन की अहम बैठक शुरू, कारोबार-ऊर्जा और रक्षा समेत कई मुद्दों पर चर्चा

  • BRICS शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक शुरू हो गई है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक को भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BY Shirin ·
News Image

लाल किला ब्लास्ट की चार्जशीट में बड़े खुलासे

  • लाल किले के पास हुए वाहन बम विस्फोट मामले की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी की ओर से दाखिल आरोपपत्र के मुताबिक, मुख्य आरोपी उमर-उन-नबी ने पहले चांदनी चौक स्थित लाल मंदिर को निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन भारी ट्रैफिक और पुलिस की मौजूदगी के कारण वह वहां विस्फोट नहीं कर सका। इसके बाद उसने लाल किले की ओर रुख किया, जहां वाहन में धमाका हुआ।
BY Shirin ·