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ओणम 2026: क्यों मनाया जाता है ये खास त्योहार? जानें महत्व और पौराणिक कथा

 

Onam 2026: ओणम केरल और मलयाली समुदाय का प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार सिर्फ धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि प्रकृति, फसल, समृद्धि और आपसी भाईचारे से भी जुड़ा हुआ है। ओणम को मलयाली नव वर्ष और नई फसल के स्वागत के पर्व के तौर पर मनाया जाता है। खास बात यह है कि इसे धर्म और जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर लोग मिल-जुलकर मनाते हैं।

चिंगम मास में मनाया जाता है ओणम

ओणम मलयालम कैलेंडर के पहले महीने चिंगम में मनाया जाता है, जो आमतौर पर अगस्त-सितंबर के बीच आता है। यह त्योहार कई दिनों तक चलता है और इसके दौरान घरों को फूलों से सजाया जाता है। लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं और विशेष पकवान बनाकर त्योहार की खुशियां मनाते हैं।

महाबली से जुड़ी है पौराणिक कथा

ओणम की सबसे प्रमुख पौराणिक मान्यता राजा महाबली से जुड़ी है। कहा जाता है कि महाबली एक दयालु और न्यायप्रिय असुर राजा थे। उनके शासनकाल में प्रजा सुखी और समृद्ध थी। उनकी लोकप्रियता और शक्ति से देवता चिंतित हो गए।

मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा महाबली के पास पहुंचे। उन्होंने महाबली से तीन पग भूमि दान में मांगी। महाबली ने उनकी इच्छा स्वीकार कर ली। इसके बाद वामन ने विराट रूप धारण कर दो पग में पूरी धरती और आकाश नाप लिया।

तीसरे पग के लिए महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया। उनकी भक्ति और त्याग से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक जाने का आदेश दिया, लेकिन साथ ही उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने के लिए धरती पर आने का वरदान भी दिया।

महाबली के स्वागत में मनाया जाता है ओणम

मान्यता है कि राजा महाबली के धरती पर आने की खुशी में लोग अपने घरों को सजाते हैं, फूलों की रंगोली पूक्कलम बनाते हैं और पारंपरिक भोज ओणम सद्या का आयोजन करते हैं। इस तरह ओणम लोगों के लिए महाबली के स्वागत, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक बन गया।

ओणम का संदेश केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। यह समानता, भाईचारे, प्रकृति के सम्मान और सामूहिक खुशियों का पर्व भी माना जाता है। यही वजह है कि केरल समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में मलयाली समुदाय इसे बड़े उत्साह के साथ मनाता है।

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