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परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट रद्द, मुख्यमंत्री विजय बोले- किसानों के साथ खड़ी सरकार


तमिलनाडु में चेन्नई के पास प्रस्तावित परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार ने परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को रद्द करने का फैसला किया है। इस परियोजना का स्थानीय किसान और ग्रामीण लंबे समय से विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि एयरपोर्ट के लिए बड़ी मात्रा में उपजाऊ कृषि भूमि और जलस्रोत प्रभावित हो सकते हैं।

परंदूर चेन्नई से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां प्रस्तावित नए हवाई अड्डे को चेन्नई के मौजूदा हवाई अड्डे के विकल्प के तौर पर विकसित करने की योजना थी। हालांकि, परियोजना की घोषणा के बाद से ही स्थानीय स्तर पर इसका विरोध शुरू हो गया था। किसानों और ग्रामीणों ने जमीन, जलाशयों और पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई थी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी टीवीके शुरू से ही परियोजना का विरोध कर रहे स्थानीय लोगों और किसानों के समर्थन में रही है। विधानसभा चुनाव से पहले भी विजय ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। अब सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने परियोजना को रद्द करने का फैसला किया है।

 किसानों के हितों की कीमत पर विकास नहीं: मुख्यमंत्री विजय

परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को रद्द करने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सरकार प्रस्तावित परियोजना को वापस ले रही है और एयरपोर्ट के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोगों के साथ वह मजबूती से खड़े हैं।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए हवाई अड्डों की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन विकास की प्रक्रिया किसानों के कल्याण की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अक्टूबर 2024 में विक्रवांडी में हुई एक बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जनता से किए गए वादे को पूरा करने के लिए उनकी सरकार परंदूर में नया हवाई अड्डा स्थापित करने से जुड़े सभी कदमों को वापस ले रही है।

 डीएमके ने सरकार पर साधा निशाना

सरकार के फैसले के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके ने विजय सरकार से परियोजना से जुड़ी पिछली फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

डीएमके के वरिष्ठ नेता दुरईमुरुगन ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री पिछली सरकार के दौरान शुरू की गई परियोजना से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक नहीं करते हैं, तो विपक्ष विधानसभा में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकता है।

डीएमके का आरोप है कि सरकार को परियोजना से जुड़े तथ्यों और पिछली सरकार के फैसलों को स्पष्ट रूप से सामने रखना चाहिए। पार्टी ने दावा किया है कि अगर तय समय में फाइलें सार्वजनिक नहीं की गईं, तो विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया जाएगा।

इस तरह एयरपोर्ट परियोजना को रद्द करने का फैसला भले ही किसानों के आंदोलन के लिए बड़ी राहत माना जा रहा हो, लेकिन इसके साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

वैकल्पिक स्थान की तलाश भी जारी

परंदूर परियोजना को लेकर विरोध के बीच सरकार पहले ही वैकल्पिक विकल्पों पर विचार करने की बात कह चुकी थी। सत्ता में आने के बाद विजय सरकार ने संकेत दिया था कि ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए पहले से चिन्हित स्थान की समीक्षा की जाएगी।

टीवीके नेता सीटीआर निर्मल कुमार के अनुसार, स्थानीय जलाशयों और उपजाऊ कृषि भूमि की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संभावित वैकल्पिक स्थानों की पहचान की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा था।

इसका मतलब यह है कि सरकार ने चेन्नई के लिए नए एयरपोर्ट की जरूरत को पूरी तरह खारिज नहीं किया है, बल्कि मौजूदा स्थान को लेकर पुनर्विचार किया जा रहा है। भविष्य में किसी दूसरे स्थान पर एयरपोर्ट परियोजना आगे बढ़ सकती है।

 अप्रैल 2025 में मिली थी सैद्धांतिक मंजूरी

परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को केंद्र के नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अप्रैल 2025 में सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। प्रस्तावित एयरपोर्ट कांचीपुरम जिले के अंतर्गत आने वाले परंदूर क्षेत्र में बनाया जाना था।

परियोजना का उद्देश्य चेन्नई की बढ़ती हवाई यातायात जरूरतों को पूरा करने के लिए एक नया बड़ा एयरपोर्ट तैयार करना था। हालांकि, स्थानीय विरोध, कृषि भूमि और जलस्रोतों से जुड़े सवालों के कारण परियोजना लगातार विवादों में रही।

अब तमिलनाडु सरकार के इसे रद्द करने के फैसले के बाद किसानों और ग्रामीणों के लंबे आंदोलन को बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, इस फैसले ने टीवीके और डीएमके के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।
 

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