Latest News Lifestyle
चीनी के दाम में उबाल! कई जगह 65 रुपये किलो तक पहुंचा भाव, जानिए संकट की 5 बड़ी वजहें

 दिल्ली, 21 अगस्त। देश में चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 चीनी सीजन में मिलों का उत्पादन शुरुआती अनुमान के मुकाबले कम रहा है। उत्पादन में कमी ने बाजार में उपलब्धता पर दबाव बढ़ाया है।

चीनी संकट के पीछे सिर्फ कम उत्पादन ही जिम्मेदार नहीं है।

गन्ने की कमजोर उपज और मौसम की मार ने भी उत्पादन को प्रभावित किया। प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में बारिश और अन्य मौसमी परिस्थितियों के कारण फसल की गुणवत्ता तथा चीनी की रिकवरी पर असर पड़ा।

इसके अलावा एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का डायवर्जन, शुरुआती चीनी निर्यात और राज्यों में स्टॉक का असमान वितरण भी बाजार में आपूर्ति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं।इन वजहों से कुछ बाजारों में चीनी की उपलब्धता कम महसूस की जा रही है और खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। कई जगहों पर चीनी का भाव 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि, कीमतें क्षेत्र और बाजार के अनुसार अलग-अलग हैं।बाजार में आपूर्ति का दबाव कम करने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में उत्पादन, स्टॉक और आपूर्ति की स्थिति चीनी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई वजहें

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल चीनी मिलों में उत्पादन अनुमान के मुताबिक नहीं रहा है। हालांकि, बाजार में चीनी की मौजूदा स्थिति के पीछे केवल उत्पादन में कमी ही जिम्मेदार नहीं है।

गन्ने की कमजोर उपज, मौसम की मार, एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का डायवर्जन, शुरुआती निर्यात और विभिन्न राज्यों में चीनी के स्टॉक का असमान वितरण भी प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इन सभी परिस्थितियों ने बाजार में चीनी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। मांग के मुकाबले आपूर्ति प्रभावित होने से कई जगहों पर चीनी के दाम बढ़े हैं।

सरकार के सामने चुनौती

कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी रोकने के लिए सरकार चीनी के उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और बाजार की स्थिति पर नजर रख रही है। जरूरत पड़ने पर आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए नीतिगत कदम उठाए जा सकते हैं।

फिलहाल चीनी की कीमतों में क्षेत्रवार अंतर बना हुआ है। ऐसे में 65 रुपये प्रति किलो का भाव सभी जगह की सामान्य कीमत नहीं माना जा सकता, बल्कि कुछ बाजारों में दर्ज ऊंची खुदरा कीमत के रूप में देखा जाना चाहिए।

2025-26 चीनी सीजन में देश में चीनी का उत्पादन घरेलू खपत से कम रहने की आशंका जताई जा रही है। कुछ व्यापारिक अनुमानों के अनुसार, इस सीजन में नेट चीनी उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन, जबकि घरेलू खपत लगभग 2.85 करोड़ टन रह सकती है।

उत्पादन और खपत के बीच यह अंतर बाजार में आपूर्ति पर दबाव बढ़ा सकता है। शुरुआती स्टॉक भी सीमित रहने की स्थिति में उपलब्ध चीनी की अहमियत बढ़ जाती है। ऐसे में मांग पूरी करने के लिए बाजार को अतिरिक्त आपूर्ति की जरूरत पड़ सकती है।

अगर उत्पादन अनुमान से कम रहता है और खपत लगातार बनी रहती है, तो चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में उत्पादन, शुरुआती स्टॉक और बाजार में उपलब्धता चीनी के दाम की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

चीनी के दाम बढ़े, कई शहरों में 60-65 रुपये किलो तक भाव

  • लखनऊ: ₹56__ प्रति किलो
  • दिल्ली: ₹_65_ प्रति किलो
  • जयपुर: ₹58__ प्रति किलो
  • मुंबई: ₹_67_ प्रति किलो
  • पटना: ₹65__ प्रति किलो
  • वाराणसी: ₹_65_ प्रति किलो
  • जम्मू: ₹__65 प्रति किलो
  • चीनी के निर्यात पर रोक
  • केंद्र ने 13 मई 2026 से चीनी निर्यात पर रोक लगाई है, जो फिलहाल 30 सितंबर 2026 तक लागू है. इसका मकसद घरेलू बाजार के लिए चीनी बचाना और कीमतों को काबू में रखना है. EU और अमेरिका के कुछ तय कोटे, एडवांस ऑथराइजेशन जैसे सीमित अपवाद रखे गए हैं.

News Image

UP: सभी 75 जिलों में लागू होगी दुग्ध योजना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी सरकार

  • सरकार अब दुग्ध योजना का दायरा बढ़ाकर इसे प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने पर जोर दे रही है। योजना के विस्तार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त साधन तैयार करना और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है। दुग्ध उत्पादन से महिलाओं को जोड़ने के साथ उन्हें पशुपालन और दूध के बेहतर प्रबंधन से होने वाली आय का लाभ दिलाने की कोशिश की जा रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
BY Himanshu Dubey ·
News Image

यूपी चुनाव 2027: बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व फुल एक्शन मोड में, हारी सीटों पर खास फोकस

  • 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन बीजेपी ने सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि संगठन की यह रणनीति चुनावी मैदान में पार्टी को कितना फायदा पहुंचाती है।
BY Himanshu Dubey ·