रामपुर में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री आजम खान से जुड़े जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। बुधवार सुबह करीब 7 बजे ED की टीम ने आजम खान के जेल रोड स्थित आवास, जौहर विश्वविद्यालय और उनके कुछ करीबियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी शुरू की।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब आयकर विभाग पहले ही मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन और विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च की गई रकम को लेकर जानकारी मांग चुका है। जांच एजेंसियों की नजर खास तौर पर इस बात पर है कि जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण और उससे जुड़े दूसरे कार्यों में इस्तेमाल हुई रकम का स्रोत क्या था और ट्रस्ट ने इस धनराशि का किस तरह इस्तेमाल किया।
₹494 करोड़ के खर्च का मांगा गया ब्योरा
जौहर ट्रस्ट से जुड़े रिकॉर्ड के अनुसार जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर अनुमानित ₹494 करोड़ खर्च होने की बात सामने आई है। आयकर विभाग ने ट्रस्ट से इस खर्च का विस्तृत ब्योरा और उससे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था। इसमें विश्वविद्यालय के लिए खरीदी गई जमीन, भवन निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे विकास कार्यों पर खर्च की गई रकम की जानकारी शामिल थी।
आयकर विभाग के अनुसार ट्रस्ट इन सभी खर्चों का अपेक्षित दस्तावेजी ब्योरा उपलब्ध नहीं करा सका। इसी वजह से ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियां जांच के दायरे में आईं। हालांकि, ₹494 करोड़ के खर्च और उससे जुड़े आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
ट्रस्ट का पंजीकरण भी हुआ निरस्त
आयकर विभाग ने 23 जून को आय और व्यय का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं कराने समेत कथित वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण निरस्त कर दिया था। इसके बाद विभाग ने ट्रस्ट को नोटिस जारी कर वर्ष *2015 से 2020* के दौरान हुई आय और खर्च की विस्तृत जानकारी मांगी।
नोटिस में जौहर विश्वविद्यालय के लिए जमीन खरीदने, निर्माण कार्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य गतिविधियों पर खर्च की गई रकम के समर्थन में दस्तावेज और साक्ष्य देने के निर्देश दिए गए थे।
11 संदिग्ध फर्मों से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे
आयकर विभाग की जांच केवल विश्वविद्यालय के निर्माण खर्च तक सीमित नहीं रही। विभाग ने उन *11 फर्मों* से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगे, जिनके बारे में कथित तौर पर ट्रस्ट को दान के नाम पर करोड़ों रुपये दिए जाने की जानकारी सामने आई थी।
ट्रस्ट से इन लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों का ब्योरा मांगा गया। बताया गया कि ट्रस्ट की ओर से दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए आयकर विभाग से अतिरिक्त समय की मांग की गई थी।
जुलाई में ED ने मांगा था मुकदमों का विवरण
ED की मौजूदा कार्रवाई से पहले जुलाई में जांच एजेंसी ने पुलिस और प्रशासन से आजम खान के खिलाफ दर्ज मुकदमों की जानकारी मांगी थी। इसके बाद से ही यह संभावना जताई जा रही थी कि जांच एजेंसी रामपुर में आजम खान और उनसे जुड़े संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
अब जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े ठिकानों पर हुई छापेमारी को उसी जांच की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। ED की ओर से छापेमारी के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी।
2022 में भी ED ने की थी प्रारंभिक पड़ताल
जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामले में ED की सक्रियता नई नहीं है। इससे पहले *2022* में भी ED की एक टीम रामपुर पहुंची थी और विश्वविद्यालय से संबंधित मामलों की प्रारंभिक पड़ताल की थी।
अब एक बार फिर जांच एजेंसी के सक्रिय होने के बाद जौहर ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियां और विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल धनराशि जांच के केंद्र में आ गई है।
आजम खान से जुड़े कई मामलों में आ चुके हैं फैसले
आजम खान के खिलाफ अलग-अलग मामलों में अदालतों में लंबे समय से सुनवाई चलती रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब तक उनके *16 मामलों* में अदालतों के फैसले आ चुके हैं। इनमें 8 मामलों में सजा और 8 मामलों में राहत या क्लीन चिट मिलने की बात कही गई है।
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद आजम खान के खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज किए गए थे। इन मामलों में जमीन, सरकारी संपत्ति, दस्तावेज और अन्य आरोपों से जुड़े प्रकरण शामिल रहे हैं।
वर्तमान में आजम खान रामपुर जेल में सजा काट रहे हैं। दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में उन्हें 10 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा डूंगरपुर मामले में भी उन्हें 10 वर्ष की सजा मिली थी।
जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों का मामला भी चर्चा में
जौहर विश्वविद्यालय हाल के दिनों में एक अन्य प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी चर्चा में रहा है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय परिसर में बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए *38 भवनों* के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था।
हालांकि, मंडलायुक्त ने ध्वस्तीकरण के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन और आजम खान को फिलहाल राहत मिली थी।
आगे क्या होगा?
ED की छापेमारी के बाद अब जांच एजेंसी ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और धन के स्रोत की जांच कर सकती है। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या कानून के उल्लंघन से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो एजेंसी आगे कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
फिलहाल ₹494 करोड़ के खर्च, ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड और 11 फर्मों से जुड़े लेनदेन की जांच के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। इसलिए मामले में सामने आए आरोपों को जांच के निष्कर्ष से अलग रखना जरूरी है।