मेरठ। जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्ध आतंकी मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों की जांच में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क को लेकर कई अहम खुलासे सामने आए हैं। जफर पर आरोप है कि वह पाकिस्तान जाने की तैयारी में था और इसके लिए बिहार से पासपोर्ट बनवाने की कोशिश कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि उसकी पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख आतंकी मसूद अजहर से मुलाकात की योजना थी। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं और अंतिम तथ्य जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंकी नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने पश्चिमी यूपी के अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए करीब 16 संदिग्ध आतंकियों को हिरासत में लिया है। इनमें जफर का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। जांच का फोकस इस बात पर है कि इन संदिग्धों के बीच किस तरह का संपर्क था, उन्हें किस नेटवर्क से निर्देश मिल रहे थे और क्या उनका इस्तेमाल किसी बड़ी आतंकी साजिश के लिए किया जाना था।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से कथित तौर पर जुड़े गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। उनके मुताबिक, कार्रवाई के दौरान 200 से ज्यादा ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया गया और संभावित आतंकी हमलों की योजनाओं को नाकाम किया गया।
गृह मंत्री के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने 14 राज्यों में अभियान चलाया। इस कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे नेटवर्क को तोड़ना था, जिनके जरिए आतंकियों और उनके सहयोगियों को मदद, संपर्क, संसाधन या लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराए जाने की आशंका थी। एजेंसियां अब गिरफ्तार किए गए लोगों के आपसी संपर्क, वित्तीय लेनदेन, डिजिटल गतिविधियों और विदेश में मौजूद संदिग्ध नेटवर्क से संबंधों की जांच कर रही हैं।
जफर के मामले में बिहार से पासपोर्ट बनवाने की कथित कोशिश को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पासपोर्ट के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, पहचान और पते से जुड़ी जानकारी किस तरह उपलब्ध कराई गई और क्या इस पूरी प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह ने उसकी मदद की थी।
जांच एजेंसियों को यह भी आशंका है कि पाकिस्तान पहुंचने के बाद जफर को आतंकी संगठन के वरिष्ठ सदस्यों से संपर्क स्थापित करना था। मसूद अजहर से कथित मुलाकात की जानकारी ने जांच को और गंभीर बना दिया है। अब एजेंसियां उसके मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, संपर्कों और अन्य बरामद सामग्री की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किन लोगों के संपर्क में था और उसके संभावित पाकिस्तान कनेक्शन की वास्तविक भूमिका क्या थी।
पूरे मामले में सुरक्षा एजेंसियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी संदिग्ध नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही हैं। अधिकारियों का फोकस केवल गिरफ्तार लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों की पहचान पर भी है जो कथित तौर पर इन संदिग्धों को आर्थिक, तकनीकी या अन्य प्रकार की सहायता उपलब्ध करा रहे थे।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकवाद से जुड़े किसी भी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को तेज किया जा रहा है। आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच के आधार पर और गिरफ्तारियां या नए खुलासे सामने आ सकते हैं। फिलहाल जफर से जुड़े पाकिस्तान कनेक्शन, पासपोर्ट प्रक्रिया और कथित आतंकी संपर्कों की जांच जारी है।