ड्रोन युद्ध का बढ़ता इस्तेमाल अब यूक्रेन और ईरान से जुड़े संघर्षों को एक-दूसरे से जोड़ता दिख रहा है, जो आधुनिक सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि बिना चालक वाले सिस्टम न सिर्फ युद्ध के तरीके बदल रहे हैं, बल्कि वैश्विक ताकत संतुलन को भी प्रभावित कर रहे हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने हाल ही में एक ऑपरेशन का जिक्र किया, जिसमें ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम की मदद से रूसी ठिकाने पर कब्जा किया गया। इसे उन्होंने भविष्य के युद्ध की झलक बताया।
संघर्ष की शुरुआत से ही ईरान ने रूस को शाहेद ड्रोन उपलब्ध कराए, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन के शहरों और बुनियादी ढांचे पर हमलों में हुआ। समय के साथ यह सहयोग बढ़ा और रूस में ही इन ड्रोन का उत्पादन शुरू हो गया, जिससे बड़े पैमाने पर हमले संभव हुए।
इसके जवाब में यूक्रेन ने तेजी से नवाचार किया। इंजीनियरों, स्टार्टअप्स और सैन्य इकाइयों के सहयोग से देश ने कम लागत वाले और प्रभावी ड्रोन सिस्टम विकसित किए। अब यूक्रेन रोजाना हजारों ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है, जो निगरानी, रक्षा और सटीक हमलों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
वहीं, अमेरिका ने भी ईरान की ड्रोन और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करने के प्रयास तेज किए हैं। हाल के अभियानों में ईरान के उत्पादन केंद्रों और भंडारण स्थलों को निशाना बनाया गया है।
ईरान ने अप्रैल 2024 में इज़राइल पर ड्रोन और मिसाइलों से बड़ा हमला कर अपनी क्षमता भी दिखाई, जो रूस की रणनीति से मेल खाती है।
इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि भविष्य का युद्ध तकनीक, खासकर ड्रोन और ऑटोमेशन, पर अधिक निर्भर होगा। यूक्रेन की तकनीकी प्रगति और ईरान की क्षमताओं को सीमित करने की कोशिशें वैश्विक सुरक्षा पर गहरा असर डाल सकती हैं।