कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बहुमत सरकार हासिल कर अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत कर लिया है। उनकी लिबरल पार्टी ने हाउस ऑफ कॉमन्स में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया, जिससे उन्हें नीतिगत फैसलों में ज्यादा स्वतंत्रता मिल गई है।
यह जीत ऐसे समय में आई है जब कार्नी, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का खुलकर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने खासतौर पर “अमेरिका फर्स्ट” नीति, टैरिफ और कनाडा को लेकर दिए गए विवादित बयानों का विरोध किया है।
बहुमत मिलने के बाद अब कार्नी सरकार अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता कम करने और अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने पर जोर दे सकती है।
ट्रंप के सख्त रुख के कारण कनाडा में राष्ट्रीय एकता की भावना भी मजबूत हुई है। कई लोग अमेरिका यात्रा से बच रहे हैं और अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार कर रहे हैं, जिसे कार्नी ने देश की संप्रभुता को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा है।
हालांकि, विपक्षी नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करने की रणनीति को लेकर कुछ आलोचनाएं भी हो रही हैं। आलोचकों का मानना है कि इससे पार्टी के मूल सिद्धांत कमजोर हो सकते हैं।
फिर भी, मौजूदा वैश्विक हालात में कार्नी का मजबूत जनादेश उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का मौका देगा।