नेपाल की राजधानी काठमांडू के पूर्व मुख्य जिला अधिकारी छबि रिजाल को जेन-ज़ेड प्रदर्शन आंदोलन पर कथित हिंसक कार्रवाई में भूमिका के आरोप में मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
नेपाल पुलिस के अनुसार, रिजाल को काठमांडू के सुबिधानगर स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। उन पर उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल होने का आरोप है,
जिनकी भूमिका पिछले वर्ष सितंबर में हुए इस दमन में बताई जा रही है, जिसमें 76 लोगों की मौत हुई थी।
इससे पहले नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
सरकार द्वारा गठित जांच आयोग ने इन सभी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की थी।
इस बीच, नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने ओली को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। उनकी पत्नी राधिका शाक्य द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई
करते हुए न्यायमूर्ति मेघराज पोखरेल ने उनकी रिहाई का आदेश देने से इंकार कर दिया।
ओली और लेखक को इससे पहले 29 मार्च 2026 को काठमांडू जिला अदालत द्वारा पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
ये गिरफ्तारियां नए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अपनी पहली कैबिनेट बैठक में जांच आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी देने के बाद हुई हैं।
भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और प्रस्तावित सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुए जेन-ज़ेड प्रदर्शनों ने अंततः ओली को सत्ता से हटाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।
यह मामला नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा रहा है, क्योंकि प्रशासन इस कार्रवाई से जुड़े आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।