नई दिल्ली बुधवार, 22 जुलाई 2026 नीट (NEET) पेपर लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर चल रहे वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त करने की इच्छा जताई है. हालांकि, उन्होंने अनशन तोड़ने से ठीक पहले केंद्र सरकार के सामने एक नई शर्त रख दी है.
केंद्रीय मंत्रियों को लिखा पत्र, मुलाकात के लिए जताया आभार
सोनम वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने दोनों दिग्गज नेताओं को धन्यवाद दिया, जो देर रात अचानक गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे.
वांगचुक ने बताया कि मंत्रियों के साथ हुई इस बातचीत के दौरान सरकार की ओर से उनकी कुछ प्रमुख मांगों पर सकारात्मक विचार करने और आगामी संसद सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा कराने का भरोसा दिया गया है.
क्या है वांगचुक की नई शर्त?
सोनम वांगचुक ने पत्र में लिखा है कि वह सरकार के सकारात्मक रवैये का स्वागत करते हैं और अनशन खत्म करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी एक अंतिम शर्त है. वांगचुक ने मांग की है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा जवाबदेही को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र और सीजेपी (CJP) के कार्यकर्ताओं पर पुलिस या प्रशासन द्वारा कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए.
उन्होंने सरकार से लिखित या मौखिक रूप से यह आश्वासन मांगा है कि आंदोलनकारियों को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा, जिसके तुरंत बाद वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे.
65 सांसदों की अपील का दिया हवाला
अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने इस बात का भी जिक्र किया कि देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसद अब तक उनसे अनशन तोड़ने की अपील कर चुके हैं और संसद में छात्रों की आवाज उठाने का वादा कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधि और खुद सरकार इस गंभीर विषय पर बात करने को तैयार है, तो वह आंदोलन के इस चरण को विराम देने के पक्ष में हैं, बशर्ते प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े थे वांगचुक
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक पिछले तीन हफ्तों से लगातार अनशन पर थे, जिसके चलते उनका स्वास्थ्य काफी बिगड़ गया था और उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से मेदांता शिफ्ट करना पड़ा था. वह देश की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और कथित नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए थे.
राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि यदि सरकार वांगचुक की इस नई शर्त को स्वीकार कर लेती है, तो पिछले कई दिनों से दिल्ली में चल रहा यह हाई-प्रोफाइल गतिरोध आज शाम तक पूरी तरह समाप्त हो सकता है